Bihar Embankment: भागलपुर में गंगा नदी के बढ़ते दबाव के बीच बिहार के राघोपुर-शंकरपुर तटबंध पर मंडरा रहा बड़ा खतरा फिलहाल टल गया है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों की टीम ने दिन-रात मौके पर डटे रहकर लगातार निगरानी और ‘फ्लड फाइटिंग’ का काम किया, जिससे तटबंध को सुरक्षित कर लिया गया है। यह पूरे इलाके के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि इससे गंगा की बाढ़ का खतरा टल गया।
इस अभियान में चार दर्जन से ज्यादा इंजीनियरों की टीम लगातार तटबंध पर मुस्तैद रही। जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता और टीम लीडर इंजीनियर जय प्रकाश ने बताया कि राघोपुर-शंकरपुर तटबंध के पास गंगा नदी के बहाव में आए बदलाव के कारण ‘फ्लड फाइटिंग’ के दौरान काफी मशक्कत करनी पड़ी। तटबंध के क्षतिग्रस्त होने के बाद विभागीय स्तर पर युद्धस्तर पर काम किया गया और तात्कालिक तौर पर इसे सुरक्षित कर लिया गया है।
स्थायी समाधान की दिशा में बढ़ा विभाग
इंजीनियर जय प्रकाश ने आगे जानकारी दी कि इस पूरे अभियान में बिहार सरकार, विभागीय मंत्री और इलाके के दोनों मंत्रियों का भरपूर सहयोग मिला। इंजीनियरों और कर्मियों की टीम ने लगातार मौके पर रहकर तटबंध की निगरानी की। उन्होंने बताया कि इस्माईलपुर इलाके में जिस तरह ‘सीट पाइलिंग’ के जरिए बांध को सुरक्षित किया गया है, उसी तर्ज पर राघोपुर तटबंध की आगे स्थायी मरम्मति को लेकर भी विभागीय स्तर पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
इसके बाद ही आगे की कार्ययोजना और तकनीकी समाधान पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाएगा। यह कदम भविष्य में बाढ़ और कटाव के खतरों से इलाके को बचाने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
राघोपुर और शंकरपुर के ग्रामीणों ने तटबंध की सुरक्षा में जुटी इंजीनियरों की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, ‘ऐसे इंजीनियरों और कर्मचारियों की मेहनत को सलाम है, लेकिन अब जरूरत है कि तटबंध की ऐसी स्थायी मरम्मति हो, जिससे आने वाले दिनों में भी पूरा इलाका बाढ़ और कटाव के खतरे से सुरक्षित रह सके।’
ग्रामीणों की यह मांग जल संसाधन विभाग की स्थायी समाधान की योजना को और बल देती है। विभाग की आगामी रणनीति यह सुनिश्चित करेगी कि राघोपुर तटबंध भविष्य में भी सुरक्षित रहे और गंगा के संभावित रौद्र रूप से स्थानीय आबादी को किसी तरह का नुकसान न हो।







