Darbhanga bridge: बिहार के दरभंगा जिले में हजारों ग्रामीणों के लिए आवागमन एक बड़ी समस्या बन गई है। लगमा पंचायत के बथई गांव में बना वैकल्पिक चचरी पुल बरसात के पानी में पूरी तरह डूब गया है। इसके कारण क्षेत्र के लोगों को अब 12 से 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ रहा है।
दरभंगा में 4.90 करोड़ का पुल डेढ़ साल से अटका, बारिश में डूबा चचरी पुल; अब 15 KM का चक्कर काट रहे हजारों ग्रामीण
Darbhanga bridge: बिहार के दरभंगा जिले में एक पुल के निर्माण में देरी ने हजारों ग्रामीणों का जीवन दूभर कर दिया है। बथई गांव में 4.90 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आरसीसी पुल का काम डेढ़ साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। इस लापरवाही का आलम यह है कि ग्रामीणों के लिए बनाया गया वैकल्पिक चचरी पुल भी बारिश के पानी में डूब गया है, जिससे लोगों को अब 12 से 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।






डेढ़ साल बाद भी क्यों नहीं बना 4.90 करोड़ का पुल?
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगमा पंचायत के बथई गांव में मृत कमला नदी पर एक उच्चस्तरीय आरसीसी पुल बनना था। इस पुल की अनुमानित लागत 4.90 करोड़ रुपये है। हैरानी की बात यह है कि डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इस महत्वपूर्ण परियोजना में हो रही देरी से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
कमला नदी पर संकट, पानी में डूबा चचरी पुल
पक्के पुल के अभाव में ग्रामीणों ने अपनी सुविधा के लिए कमला नदी पर एक अस्थायी चचरी पुल का निर्माण किया था। यह चचरी पुल हजारों लोगों के लिए आवागमन का एकमात्र सहारा था, खासकर बरसात के मौसम में। लेकिन, हाल की बारिश के बाद यह चचरी पुल भी पूरी तरह से पानी में डूब गया है। इससे ग्रामीण पूरी तरह से कट गए हैं और उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
हजारों ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें, 15 KM का लंबा चक्कर
चचरी पुल के पानी में डूब जाने से अब बथई गांव और आसपास के हजारों ग्रामीणों को आवागमन के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें अपने दैनिक कामों, स्कूल, अस्पताल या बाजार जाने के लिए 12 से 15 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। यह न केवल समय और धन की बर्बादी है, बल्कि आपात स्थिति में यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे लोगों में निराशा है।
स्थानीय लोग लगातार प्रशासन से इस समस्या का समाधान करने और पुल निर्माण कार्य को जल्द से जल्द शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि संबंधित अधिकारी जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगे ताकि हजारों ग्रामीणों को इस गंभीर संकट से मुक्ति मिल सके और उन्हें अनावश्यक चक्कर लगाने से निजात मिल सके।
स्थायी पुल का निर्माण डेढ़ साल से अटका
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बथई गांव स्थित मृत कमला नदी पर 4.90 करोड़ रुपये की लागत से एक उच्चस्तरीय आरसीसी पुल का निर्माण प्रस्तावित है। यह परियोजना क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन अफसोस की बात है कि इसका कार्य पिछले डेढ़ साल से शुरू नहीं हो सका है। इस गंभीर देरी के चलते ग्रामीणों को हर साल बरसात में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है और उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
हर साल की परेशानी, नहीं मिल रहा समाधान
स्थायी पुल के अभाव में ग्रामीण अपनी सुविधा के लिए बांस और बल्लियों से अस्थायी चचरी पुल का निर्माण करते हैं। लेकिन, हर साल बरसात के मौसम में यह चचरी पुल पानी में डूब जाता है, जिससे ग्रामीणों का संपर्क टूट जाता है। इस बार भी स्थिति जस की तस है, और हजारों लोगों की आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ गई है।
ग्रामीणों को अब अपने दैनिक कामों, बच्चों को स्कूल भेजने या किसी आपात स्थिति में अस्पताल जाने के लिए लंबा और दुर्गम रास्ता तय करना पड़ रहा है। इस समस्या का जल्द समाधान न होने से स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश है, और वे जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग से लगातार मांग की जा रही है कि वे 4.90 करोड़ रुपये के लंबित पुल निर्माण कार्य को तत्काल शुरू करवाएं। यह स्थायी पुल न सिर्फ आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि हजारों ग्रामीणों के जीवन को भी बेहतर करेगा और उन्हें हर साल की इस परेशानी से मुक्ति दिलाएगा।








