BSNL Pension Revision: दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी बीएसएनएल के कर्मचारी और पेंशनर अपनी मांगों को लेकर देशव्यापी आंदोलन के तहत गुरुवार को दरभंगा में सड़कों पर उतरे। अललपट्टी स्थित महाप्रबंधक दूर संचार कार्यालय के सामने ऑल इंडिया बी. एस. एन. एल. ई. यू. एवं ऑल इंडिया बी. एस. एन. एल. एंड डी. ओ. टी. पेंशनर एसोसिएशन के संयुक्त बैनर तले यह धरना प्रदर्शन का अंतिम दिन रहा। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि भारत सरकार की हठधर्मिता और मजदूर विरोधी नीति के चलते समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, जिससे कई कर्मी और पेंशनर अपनी जान गंवा चुके हैं।
वेतन-पेंशन रिवीजन की मुख्य मांग, 2017 से बकाया
कर्मचारियों और पेंशनरों की प्रमुख मांगों में 1 जनवरी, 2017 से देय वेतन रिवीजन को लागू करना शामिल है। इसके साथ ही, आफ्टरडैवलिटी शर्त को तत्काल हटाने की मांग भी की गई है। पेंशन रिवीजन को भी 1 जनवरी, 2017 से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारी मजदूर छंटनी रोकने की भी मांग कर रहे हैं, ताकि किसी भी कर्मचारी को नौकरी से न निकाला जाए।






भारत सरकार की हठ धर्मिता एवं मजदूर विरोधी नीति के चलते इसका समाधान भारत सरकार नहीं कर रही है इसी आशा में कई कर्मी एवं पेंशनर की मृत्यु भी हो चुकी है लेकिन मजदूर विरोधी भारत सरकार इसकी कोई परवाह नहीं कर रही है।
सरकार की अनदेखी से बढ़ रहा आक्रोश, चेतावनी
धरना स्थल पर लंच के समय कर्मचारियों और पेंशनरों ने जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने भारत सरकार से समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करने का आग्रह किया। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों को पूरा करने में और देरी हुई, तो शोक में और अधिक कर्मचारी व पेंशनर अपना जीवन समाप्त कर सकते हैं। यह धरना पूरे भारत वर्ष में उपरोक्त मांगों को लेकर चल रहा है, जो केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास है।

कई नेताओं ने किया संबोधित, एकजुटता का प्रदर्शन
आज की सभा को कई प्रमुख नेताओं ने संबोधित किया, जिन्होंने कर्मचारियों और पेंशनरों की एकजुटता का प्रदर्शन किया। इनमें राजेंद्र प्रसाद मेहता (जिला मंत्री), मुक्तिनाथ झा (संगठन मंत्री), कौशल कुमार (संयुक्त जिला मंत्री), राम पुकार पासवान (संगठन मंत्री), पीतांबर पावन, मौजे पासवान, अनिल कुमार वर्मा (उपाध्यक्ष), राम केश्वर सिंह (उपाध्यक्ष), शंकर महतो (संगठन मंत्री), महमूद आलम (संगठन मंत्री), धर्मेंद्र कुमार (सहायक मंत्री), और विमलेश कुमार (संगठन मंत्री) जैसे अनेक सदस्य शामिल थे। सभी वक्ताओं ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।









