Bihar Legislature: बिहार विधानमंडल के मॉनसून सत्र का आखिरी दिन काफी हंगामेदार रहा। विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। कार्यवाही के दौरान उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और राजद एमएलसी सुनील कुमार सिंह के बीच विधान परिषद में हुई बहस ने सबका ध्यान खींचा, जबकि विधानसभा में जहानाबाद में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान फायरिंग के आरोपों को लेकर विवाद गहराया।
डिप्टी सीएम और राजद एमएलसी में तीखी बहस
विधान परिषद में यह तकरार तब शुरू हुई जब उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव सरकार का पक्ष रख रहे थे। चर्चा के दौरान राजद एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने यादव की आंखों की रोशनी से संबंधित एक टिप्पणी कर दी। इस पर उपमुख्यमंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया और तीखी प्रतिक्रिया दी। देखते ही देखते यह जुबानी जंग तेज हो गई और दोनों पक्षों के सदस्यों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाने शुरू कर दिए। सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया और जुबानी तकरार लगातार जारी रही।






राजद ने बयान पर किया विरोध प्रदर्शन
सुनील कुमार सिंह की टिप्पणी के जवाब में बिजेंद्र प्रसाद यादव ने राजद की आलोचना की और विपक्षी दल पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए। इस बयान के विरोध में राजद सदस्यों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया, जिससे बहस और बढ़ गई। इसी दौरान जद (यू) एमएलसी संजय सिंह और राजद एमएलसी सुनील कुमार सिंह के बीच भी अलग से तीखी नोकझोंक हुई, क्योंकि दोनों पक्षों के सदस्य लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

जहानाबाद छात्र प्रदर्शन पर विधानसभा में हंगामा
इस बीच, विधानसभा की कार्यवाही जहानाबाद में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित फायरिंग के मुद्दे पर बाधित हुई। राजद विधायक आलोक मेहता ने इस मामले को उठाया और आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां चलाई गईं। भाजपा विधायकों ने इन आरोपों पर आपत्ति जताई और विपक्ष के दावों का विरोध किया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तर्क दिया कि पुलिसकर्मियों और जन प्रतिनिधियों पर हमला करने वालों को छात्र नहीं माना जा सकता। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की निंदा की और सदन में निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की।
मॉनसून सत्र के अंतिम दिन जहानाबाद छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर हंगामा और विधान परिषद में व्यक्तिगत टिप्पणियों के आदान-प्रदान ने कार्यवाही पर हावी रहे। दोनों पक्षों के सदस्यों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाना जारी रखा, जिससे सत्र समाप्त होने से पहले बार-बार कार्यवाही बाधित हुई।
मॉनसून सत्र का अंतिम दिन इन्हीं राजनीतिक तकरारों और हंगामे के बीच समाप्त हो गया। सदन में गतिरोध बना रहा और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर चर्चा प्रभावित हुई। आने वाले समय में इन मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकती है।









