Darbhanga Namami Gange: दरभंगा: जिला प्रशासन ने ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम को जनभागीदारी से जोड़ने और ‘हर घर तिरंगा अभियान’ को सफल बनाने के लिए एक बड़ी पहल की है। जिला पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष, जिला गंगा समिति, दरभंगा श्री कौशल कुमार के निर्देश पर 08 अगस्त को जिला गंगा समिति कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में युवा स्वयंसेवकों और ‘नमामि गंगे’ के सक्रिय वॉलंटियरों ने भाग लिया।






बैठक की अध्यक्षता जिला परियोजना पदाधिकारी, श्री फारूक इमाम ने की। इसमें नदी संरक्षण, स्वच्छता जागरूकता और ‘हर घर तिरंगा’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों के लिए प्रभावी कार्ययोजना पर गहन चर्चा की गई। प्रशासन ने युवाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है।
कॉलेज के युवा संभालेंगे नदी संरक्षण की कमान
श्री फारूक इमाम ने स्वयंसेवकों का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया कि नदी संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह जनता की भागीदारी से सफल होने वाला एक सामाजिक अभियान है। उन्होंने नदियों को स्वच्छ और अविरल बनाने में जागरूक नागरिकों और संगठित स्वयंसेवी समूहों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। बैठक में ‘वॉलंटियर सहभागिता ट्रैकिंग प्रणाली’ पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस प्रणाली के तहत, जिला गंगा समिति द्वारा आयोजित स्वच्छता अभियान, जन-जागरूकता कार्यक्रम, वृक्षारोपण, घाट गतिविधियों, कार्यशालाओं, रैलियों और विशेष आयोजनों में स्वयंसेवकों की उपस्थिति और उनके योगदान का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जाएगा। इस रिकॉर्ड के आधार पर वर्ष के अंत में सभी सक्रिय वॉलंटियरों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, साप्ताहिक जन-जागरूकता और स्वच्छता गतिविधियों के नियमित संचालन के लिए एक प्रारंभिक कार्ययोजना भी तैयार की गई।
‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भी दिखेगी युवाओं की भागीदारी
महाविद्यालयों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से कॉलेज स्तर पर कार्यशालाएं, सेमिनार और जागरूकता बैठकें आयोजित करने पर विचार-विमर्श किया गया। प्रत्येक महाविद्यालय में ‘नमामि गंगे’ वॉलंटियर टीम गठित करने, एक वॉलंटियर कोऑर्डिनेटर या टीम लीडर का चयन करने और NSS, NCC व अन्य संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे पर्यावरण और नदी संरक्षण संबंधी गतिविधियों को संस्थागत रूप मिलेगा।
आगामी ‘हर घर तिरंगा अभियान’ और ‘वंदे मातरम्’ गतिविधियों में ‘नमामि गंगे’ वॉलंटियरों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। तिरंगा यात्रा और राष्ट्रभक्ति आधारित जन-जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन पर चर्चा हुई। नदी संरक्षण को जनसामान्य तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए नदी पुनर्जीवन और संरक्षण संदेश पर आधारित नुक्कड़ नाटक, जन-जागरूकता नाट्य प्रस्तुति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन का भी प्रस्ताव रखा गया। स्वयंसेवकों ने सुझाव दिया कि स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक माध्यमों का उपयोग कर नदी संरक्षण के संदेश को ग्रामीण और शहरी समुदायों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
क्या है ‘एडॉप्ट-ए-घाट’ पहल?
बैठक का एक महत्वपूर्ण बिंदु ‘नदी एवं जल स्रोतों के घाटों को गोद लेने (Adopt-a-Ghat Initiative)’ की अवधारणा पर विस्तृत चर्चा रही। इस पहल के अंतर्गत, जिला गंगा समिति द्वारा चयनित प्रमुख घाटों को महाविद्यालयों, युवा वॉलंटियर टीमों, NSS/NCC इकाइयों और स्थानीय सामाजिक संगठनों के सहयोग से नियमित स्वच्छता, जन-जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।
बैठक में पूजा कुमारी, संजीव कुमार और सुनील कुमार जैसे कोऑर्डिनेटरों के साथ-साथ विभिन्न महाविद्यालयों के सक्रिय वॉलंटियर अंशु कुमारी, नव्या नंदनी, नयनप्रिया, तनीषा कुमारी, अंकित आनंद, मनीषा कुमारी, श्रुति सानिया, उमा भारती, सोनू राज, श्यामा मणि, अभिषेक पंजियार, ओमकार साह, सुमित कुमार और वर्षा कुमारी सहित चालीस से अधिक वॉलंटियरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन सभी ने गंगा और अन्य नदियों के संरक्षण, घाट स्वच्छता, प्लास्टिक उन्मूलन, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।









You must be logged in to post a comment.