Bihar Waterways: बिहार में जल परिवहन को नई दिशा मिलने वाली है। राज्यभर में व्यापार और आवागमन को मजबूत करने के लिए गंगा (एनडब्ल्यू-1) और गंडक नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-37) में विकास कार्य तेजी से हो रहा है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की पहल पर 16 नए सामुदायिक जेटी के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
इन जेटी के बनने से यात्रियों और सामान की आवाजाही सुरक्षित और सुगम होगी। इसके साथ ही नावों और जहाजों पर चढ़ना-उतरना भी आसान हो जाएगा, जिससे नदियों के रास्ते व्यापार को बड़ी गति मिलेगी। आईडब्ल्यूएआई इन जेटी का निर्माण करेगा और दो साल तक सफल संचालन के बाद इन्हें इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट (आईडब्ल्यूटी), बिहार को हस्तानांतरित कर देगा।





बिहार जलमार्ग: नए जेटी से बढ़ेगा व्यापार, सुगम होगी यात्रा
परिवहन विभाग के अनुसार, कुल 17 स्थानों में से 16 जगहों पर नए सामुदायिक जेटी के निर्माण के लिए संबंधित जिलों से आईडब्ल्यूएआई को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिल चुका है। पटना जिले के एनआईटी घाट के लिए अभी एनओसी अप्राप्त है, लेकिन बाकी जगहों पर काम आगे बढ़ रहा है। राज्य में 10 स्टील जेटी का निर्माण कार्य शुरू भी हो चुका है।
इन जिलों और घाटों पर जेटी बनाने का काम प्रक्रियाधीन है:
- पटना: कंगनघाट, ग्यासपुर पीपापुल, महाजी पीपापुल
- वैशाली: कोनहराघाट, हाजीपुर (कुल दो स्थान)
- सारण: हरिहारनाथ मंदिर, सोनपुर
- समस्तीपुर: पत्थरघाट, धरनीपट्टी पश्चिम
- बेगूसराय: सिमरिया घाट, अयोध्या घाट, चित्रोघाट (कुल तीन स्थान)
- भागलपुर: एनडब्ल्यू-1 पर एक स्थान (नाम नहीं दिया गया)
- आरा: एनडब्ल्यू-1 पर एक स्थान (नाम नहीं दिया गया)
यात्रियों और व्यापारियों को मिलेगा सीधा फायदा
इन सामुदायिक जेटी के निर्माण से न केवल स्थानीय लोगों को यात्रा में सुविधा होगी, बल्कि बिहार के व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। नदियों के माध्यम से सामान की ढुलाई अधिक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल होती है, जिससे व्यापारियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जलमार्गों के विकास से बिहार की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे पड़ोसी राज्यों और नेपाल के साथ भी व्यापारिक संबंध सुदृढ़ होंगे। इन परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन राज्य के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगा।








