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दरभंगा के नौवीं के छात्रों का हैरतअंगेज आविष्कार! ‘स्मार्ट स्टिक’ से दूर होगी दृष्टिबाधितों की हर मुश्किल

Darbhanga Smart Stick: हनुमाननगर के उच्च माध्यमिक विद्यालय मोरो के नौवीं कक्षा के छात्र उत्तम और सचिन ने रोबोटिक्स से तैयार की ऐसी छड़ी, जो ध्वनि संकेत से राह में आने वाली बाधाओं की जानकारी देकर दुर्घटनाओं से बचाएगी।

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Darbhanga Smart Stick: बिहार के दरभंगा जिले के हनुमाननगर प्रखंड स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय मोरो के छात्रों ने एक ऐसा अभिनव समाधान प्रस्तुत किया है, जो दृष्टिबाधित लोगों के जीवन को सुरक्षित और आसान बना सकता है। नौवीं कक्षा के छात्र उत्तम कुमार और सचिन कुमार ने रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर ‘स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक’ विकसित की है। यह अत्याधुनिक छड़ी सड़क पर आने वाली बाधाओं की पूर्व सूचना ध्वनि संकेत के माध्यम से देकर दुर्घटनाओं की आशंका को काफी हद तक कम करेगी। यह छात्रों की तकनीकी समझ और सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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दरभंगा के इन छात्रों ने कर दिया कमाल! दृष्टिबाधितों के लिए बना दी ऐसी छड़ी, अब नहीं होगा कोई हादसा

Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है। हनुमाननगर प्रखंड स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय मोरो के युवा छात्रों ने रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से दृष्टिबाधित लोगों के लिए एक अद्भुत ‘स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक’ का निर्माण किया है। यह नवाचार न केवल छात्रों की प्रतिभा को दर्शाता है, बल्कि सामाजिक समस्याओं के तकनीकी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।दरभंगा के नौवीं के छात्रों का हैरतअंगेज आविष्कार! 'स्मार्ट स्टिक' से दूर होगी दृष्टिबाधितों की हर मुश्किल

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कैसे काम करती है यह स्मार्ट स्टिक?

इस स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सड़क पर चलते समय सामने आने वाले किसी भी अवरोध की जानकारी उपयोगकर्ता को पहले ही ध्वनि संकेत के माध्यम से दे देती है। इससे दृष्टिबाधित व्यक्ति संभावित दुर्घटनाओं से बच सकते हैं और उनकी यात्रा अधिक सुरक्षित हो जाती है। कक्षा नवम के छात्र उत्तम कुमार और सचिन कुमार ने प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में इस परियोजना को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

छात्रों ने बताया, ‘स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक के निर्माण में एलडीआर सेंसर, ऑर्डिनो बोर्ड और बजर का उपयोग किया गया है। सेंसर से मिलने वाले संकेत पर बजर तुरंत बज उठता है, जिससे उपयोगकर्ता को खतरे के प्रति सतर्कता मिल जाती है।’

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रोबोटिक्स शिक्षा का कमाल

प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि विद्यालय में शिक्षा विभाग की पहल पर रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। ISM लैब के तहत उपलब्ध कराई गई रोबोटिक्स किट और विभिन्न सेंसरों की सहायता से छात्र अब सामाजिक समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने में सक्षम हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सौरभ सुमन से प्राप्त प्रशिक्षण का लाभ इन विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है।इस नवाचारी पहल से विद्यालय के विद्यार्थियों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। आने वाले दिनों में छात्र कई अन्य रचनात्मक परियोजनाएं भी प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं, जो समाज के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। यह ‘स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक’ बिहार में तकनीकी शिक्षा और युवा नवाचार के बढ़ते कदमों का एक शानदार उदाहरण है, जो अन्य छात्रों को भी प्रेरित करेगा।

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तकनीक की समझ: कैसे काम करती है यह स्मार्ट स्टिक?

प्रधानाध्यापक जितेन्द्र कुमार के मार्गदर्शन में तैयार की गई इस स्मार्ट स्टिक का मुख्य उद्देश्य दृष्टिबाधित व्यक्तियों को सुरक्षित आवागमन में सहायता प्रदान करना है। छात्रों ने बताया कि इसके निर्माण में एलडीआर सेंसर, ऑर्डिनो बोर्ड और बजर जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। सेंसर जैसे ही रास्ते में किसी अवरोध का पता लगाता है, तुरंत बजर बज उठता है। यह ध्वनि संकेत उपयोगकर्ता को आने वाली बाधा के प्रति सचेत कर देता है, जिससे वे समय रहते अपनी दिशा बदल सकते हैं या सावधानी बरत सकते हैं।

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रोबोटिक्स की पढ़ाई से मिली प्रेरणा, भविष्य की योजनाएं

विद्यालय में शिक्षा विभाग की पहल पर रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई शुरू होने से छात्रों को ऐसे नवाचार करने की प्रेरणा मिली है। आईएसएम लैब के तहत उपलब्ध कराई गई रोबोटिक्स किट और विभिन्न सेंसरों की सहायता से छात्र सामाजिक समस्याओं के तकनीकी समाधान ढूंढ रहे हैं। प्रधानाध्यापक जितेन्द्र कुमार ने बताया कि राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सौरभ सुमन से प्राप्त प्रशिक्षण का लाभ इन विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है। विद्यालय प्रबंधन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में छात्र कई अन्य नवाचारी परियोजनाएं भी प्रस्तुत करेंगे, जिससे न केवल उनकी प्रतिभा को पहचान मिलेगी बल्कि समाज को भी लाभ होगा।

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छात्रों के इस कदम से बढ़ा उत्साह

इस उपलब्धि से उच्च माध्यमिक विद्यालय मोरो के विद्यार्थियों में भारी उत्साह है। यह स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक न सिर्फ छात्रों की वैज्ञानिक सोच को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि सही मार्गदर्शन और संसाधनों के साथ स्कूली छात्र भी बड़े सामाजिक बदलाव ला सकते हैं। यह पहल अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी और छात्रों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करेगी।

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