सतीश चंद्र झा, बेनीपुर। बहेड़ा महाविद्यालय बहेड़ा के प्रभारी प्राचार्य एक बार फिर वित्तीय अनियमितता को लेकर संदेह के घेरे में आ गए हैं।
शिक्षक शिक्षकेतर कर्मियों के साथ-साथ शासी निकाय के अध्यक्ष के आवेदन पर कुलसचिव ने सरकार की ओर से प्राप्त अनुदान वितरण पर रोक लगाते हुए तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण की मांग की है।






जानकारी के अनुसार, महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य शशिकांत पाठक पदस्थापना काल से ही लगातार विवादों के घेरे में चल रहे हैं। कभी मनमानी ढंग से शासी निकाय की बैठक आयोजित करने को लेकर, तो कभी वित्तीय अनियमितता को लेकर, तो कभी पठन-पाठन की व्यवस्था ठप होने को लेकर, तो कभी छात्रों के आंदोलन को लेकर ,तो कभी मनमानी ढंग से महाविद्यालय की राशि का हेराफेरी करने को लेकर चर्चा में बने रहते हैं।
वर्तमान समय में महाविद्यालय शासन निकाई के अध्यक्ष राम नारायण ठाकुर ने शिक्षाकर्मियों के आवेदन के आलोक में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव को पत्र लिखकर प्रभारी प्राचार्य की ओर से मनमानी किए जाने का आरोप लगाया था।
उक्त पत्र के आलोक में कुलसचिव ने प्रभारी प्राचार्य को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय एवं सरकार से प्राप्त अनुदान का वितरण पर रोक लगाते हुए तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, महाविद्यालय के शासी निकाय में स्थानीय अनुमंडल पदाधिकारी पदेन अध्यक्ष हुआ करते थे और विश्वविद्यालय की ओर से सचिव की नियुक्त किया जाता था। लेकिन वर्तमान प्रभारी प्राचार्य सभी नियम कानून को ताक पर रखते हुए मनमाने ढंग से शासी निकाय का व्याख्या करते हुए अपने स्तर से शासी निकाय का गठन किया एवं एकल हस्ताक्षर से महाविद्यालय के खाता का संचालन कर महाविद्यालय के राशि का मनमानी तौर तरीके से खर्च करते आ रहे हैं।
इसके कारण शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों में लगातार असंतोष की झलक समय-समय पर सामने आ रही थी ।विकास कार्य के नाम पर भी मनमाने स्तर से प्रस्ताव पारित कर संचालन किया जा रहा था। साथ ही अनियमित ढंग से पठन-पाठन के विरुद्ध छात्र एवं विभिन्न छात्र संगठन समय-समय पर आंदोलनरत रहा करते हैं।
वहीं, विश्वविद्यालय की ओ से नियुक्त स्थानीय जनप्रतिनिधि के रूप में विधायक डॉ. विनय कुमार चौधरी भी विश्वविद्यालय को सूचित कर चुके हैं कि प्रभारी प्राचार्य की ओर से मनमाने ढंग से शासी निकाय से प्रस्ताव पारित कर महाविद्यालय का संचालन कर रहे हैं जो घोर अनियमितता को दर्शाता है रुकनी चाहिए।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलसचिव मुस्ताक अहमद ने शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मी, अध्यक्ष एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि के आवेदन को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी प्राचार्य से स्पष्टीकरण मांगते हुए सरकार से प्राप्त अनुदान के वितरण पर रोक लगाने का निर्देश दिया।








