Darbhanga Music Academy: दरभंगा के राजकुमारगंज स्थित त्रिपुष्कर एकेडमी ऑफ म्यूजिक एक नई पहल के साथ सामने आई है। यह एकेडमी न सिर्फ गायन, वादन, नृत्य, योग और पेंटिंग्स का प्रशिक्षण दे रही है, बल्कि मान्यता प्राप्त संस्थाओं से परीक्षा उत्तीर्ण करने पर सर्टिफिकेट भी प्रदान करती है। यह प्रयास दरभंगा की लुप्त होती शास्त्रीय संगीत परंपराओं को फिर से जीवंत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इच्छुक व्यक्ति 9229886629 पर संपर्क कर सकते हैं।
हाल ही में एकेडमी में आयोजित एक सांगीतिक बैठक में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के संस्कृत-प्राध्यापक और एनएसएस समन्वयक डॉ. आर.एन. चौरसिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और संगीत के महत्व पर विस्तार से बात की।
डॉ. आर.एन. चौरसिया ने कहा, ‘संगीत आज के भागम-दौड़, प्रतियोगिता पूर्ण एवं अर्थ युग में शांति, सद्भावना एवं प्रसनन्ता प्रदान करता है। यह हमारी आत्मा को परमात्मा से मिलने का सहज माध्यम है। संगीत हमारे नीरस जीवन को भी जीवन्त एवं ऊर्जावान बनाए रखती है।’
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शास्त्रीय संगीत की परंपरा को मिलेगा नया जीवन
इस अवसर पर कोलकाता से आए तबला वादक गौरव चक्रवर्ती, जो पद्मश्री कुमार बोस के शिष्य हैं, ने डॉ. संजीत कुमार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि यह उनका दरभंगा का पहला दौरा है, लेकिन वे भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होते रहेंगे। मनीष कुमार खंडेलवाल ने एकेडमी के सभी सदस्यों को इस सफल सांगीतिक बैठक के आयोजन के लिए साधुवाद दिया, जिससे संगीत-परंपरा को पुनः गति मिलेगी।एकेडमी के संरक्षक डॉ. संजीत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बताया कि उनका लक्ष्य दरभंगा की शास्त्रीय संगीत की लुप्त होती सांगीतिक बैठकों की परंपराओं को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे कार्यक्रमों की प्रेरणा अपने गुरुओं और माता-पिता से मिली है। इस Darbhanga Music Academy के माध्यम से नई पीढ़ी को योग, गायन, वादन, नृत्य और पेंटिंग्स जैसी कलाओं से रुचिकर तरीके से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
बच्चों के लिए विशेष कक्षाएं और भविष्य की योजना
एकेडमी की निदेशक कृति केशरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि फिलहाल प्रत्येक रविवार को बच्चों को ये सभी कलाएं सिखाई जा रही हैं। भविष्य में सप्ताह में रविवार सहित दो दिन कक्षाएं संचालित करने की योजना है। इस सांगीतिक बैठक में कथक नृत्यकार रूपेश गुप्ता, तबला वादक कार्तिक कुमार झा, कोषाध्यक्ष सत्यम कुमार, रजनीश कुमार के साथ-साथ शिष्य रतीश मंडल, शिवाजी ठाकुर और शिवम कुमार सुंदरम समेत अनेक संगीतप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मुजफ्फरपुर से आए दिलीप कुमार ने किया। अतिथियों का स्वागत चादर, स्मृतिचिह्न और मिथिला के मख़ान से किया गया, जो बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।यह पहल न केवल दरभंगा में कला शिक्षा को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में भी मदद करेगी।














