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बिहार का ऐतिहासिक फैसला: अब खुद घर आएगा दाखिल-खारिज, वारिसों को नहीं भटकना पड़ेगा! पढ़िए – सरकारी कार्यालयों से मुक्ति

Bihar Dakhil Kharij: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने शुरू की नई व्यवस्था, गांव-गांव जाकर पहचानेंगे मृत जमाबंदी धारक; लाखों परिवारों को मिलेगा लाभ और विवाद होंगे कम.

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Bihar Dakhil Kharij: बिहार में अब मृत जमाबंदी रैयतों के उत्तराधिकारियों को अपने नाम से दाखिल-खारिज कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वर्षों तक चलने वाली इस प्रक्रिया से अब लोगों को मुक्ति मिलेगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक नई व्यवस्था शुरू की है, जिसके तहत राजस्व कर्मचारी स्वयं गांव-गांव जाकर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की जाएगी। यह कदम लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

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बिहार में अब घर बैठे मिलेगा जमीन का हक! मृत रैयतों के वारिसों को नहीं काटने होंगे सरकारी दफ्तरों के चक्कर

Bihar Dakhil Kharij: बिहार में मृत जमाबंदी रैयतों के उत्तराधिकारियों को अब अपने वैधानिक अधिकार के लिए वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक बड़ा बदलाव करते हुए ऐसी व्यवस्था लागू की है, जहां राजस्व कर्मचारी स्वयं गांव-गांव जाकर मृत जमाबंदी धारकों की पहचान करेंगे। यह कर्मचारी सूचना के आधार पर स्वतः संज्ञान लेकर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू करेंगे, जिससे लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

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राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और समाहर्ताओं को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। इस पहल का उद्देश्य पारिवारिक विवाद, मुकदमेबाजी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली कठिनाइयों को समाप्त करना है, जो मृत रैयतों के नाम पर वर्षों तक जमाबंदी लंबित रहने के कारण उत्पन्न होती थीं।

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अब खुद अधिकारी सुलझाएंगे जमीन विवाद, नहीं काटने होंगे दफ्तरों के चक्कर

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा है कि किसी भी परिवार को केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक विलंब के कारण अपने वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं रहना पड़े। अब सरकार स्वयं पहल कर ऐसे मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करेगी। यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संबंधित मौजा के सभी मृत जमाबंदी मामलों का समाधान नहीं हो जाता।

‘सरकार की मंशा है कि किसी भी परिवार को केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक विलंब के कारण अपने वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं रहना पड़े। यह पहल केवल दाखिल-खारिज तक सीमित नहीं है। यह भूमि अभिलेखों को अद्यतन, विवादमुक्त और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है। इससे लाखों रैयत परिवारों को समय पर उनका वैधानिक अधिकार मिलेगा। सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में भी सुविधा होगी।’
– डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री

प्रत्येक राजस्व कर्मचारी को अपने अधीन आने वाले हर मौजा में प्रति माह कम-से-कम पांच मृत जमाबंदी धारकों की जमाबंदी अद्यतन करना अनिवार्य होगा। इस लक्ष्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) की होगी।

पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

दाखिल-खारिज की यह पूरी प्रक्रिया बिहारभूमि पोर्टल पर ऑनलाइन माध्यम से संपन्न की जाएगी। अंचल अधिकारी हर माह के लिए लक्ष्य निर्धारित करेंगे। अपर समाहर्ता एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में अंचलवार समीक्षा बैठकें करेंगे। इसके अतिरिक्त, साप्ताहिक समीक्षा बैठकों में भी इन मामलों की प्रगति की अनिवार्य रूप से समीक्षा की जाएगी।

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सरकार इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। किसी भी स्तर पर लापरवाही, उदासीनता या निर्धारित लक्ष्य पूरा न करने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। राजस्व कर्मचारी मृत जमाबंदी धारकों की पहचान के लिए जन्म-मृत्यु निबंधन अभिलेखों, चौकीदारी रिपोर्ट, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से प्राप्त सूचनाओं का उपयोग करेंगे। जांच के बाद, उत्तराधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए जाएंगे। यदि तय समय में बंटवारे से जुड़े कागजात उपलब्ध नहीं होते हैं, तब भी केवल उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण की कार्रवाई प्रारंभ कर दी जाएगी। यह कदम बिहार में भूमि अभिलेखों को अद्यतन और विवादमुक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी सुधार है।

हर मौजा में हर महीने कम से कम पांच मृत जमाबंदी

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और समाहर्ताओं को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक देरी के कारण कोई भी परिवार अपने कानूनी अधिकारों से वंचित न रहे। नए नियम के अनुसार, प्रत्येक राजस्व कर्मचारी को अपने अधिकार क्षेत्र के हर मौजा में हर महीने कम से कम पांच मृत जमाबंदी धारकों की जमाबंदी अद्यतन करना अनिवार्य होगा। यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संबंधित मौजा के सभी मृत जमाबंदी मामलों का पूरी तरह से निस्तारण नहीं हो जाता। इस लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) की होगी।

लाखों परिवारों को अधिकार दिलाना सरकार की मंशा: मंत्री डॉ. जायसवाल

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने इस पहल पर कहा, ‘सरकार की मंशा है कि किसी भी परिवार को केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक विलंब के कारण अपने वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं रहना पड़े।’

मंत्री ने जोर देकर कहा कि मृत रैयतों के नाम पर वर्षों तक जमाबंदी लंबित रहने से पारिवारिक विवाद, मुकदमेबाजी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भारी कठिनाइयां होती थीं। अब सरकार खुद पहल कर ऐसे सभी मामलों का तेजी से निपटारा करेगी।

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ऑनलाइन प्रक्रिया और कड़े नियम, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया बिहारभूमि पोर्टल पर ऑनलाइन माध्यम से संपन्न की जाएगी। अंचल अधिकारी हर महीने के लिए लक्ष्य निर्धारित करेंगे, जिसकी समीक्षा अपर समाहर्ता और भूमि सुधार उप समाहर्ता हर महीने के पहले सप्ताह में अंचलवार करेंगे। साप्ताहिक समीक्षा बैठकों में भी इन मामलों की प्रगति की अनिवार्य रूप से समीक्षा की जाएगी। सरकार इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही, उदासीनता या निर्धारित लक्ष्य पूरा न करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

राजस्व कर्मचारी मृत जमाबंदी धारकों की पहचान के लिए जन्म-मृत्यु निबंधन अभिलेख, चौकीदारी रिपोर्ट, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से प्राप्त सूचनाओं का उपयोग करेंगे। जांच पूरी होने के बाद, उत्तराधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज लिए जाएंगे। यदि तय समय के भीतर बंटवारे से संबंधित कागजात उपलब्ध नहीं हो पाते हैं, तब भी केवल उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। डॉ. जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुधार केवल Bihar दाखिल-खारिज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भूमि अभिलेखों को अद्यतन, विवादमुक्त और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे लाखों रैयत परिवारों को समय पर उनका वैधानिक अधिकार मिलेगा और सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में भी आसानी होगी।

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