Bihar Revenue Court: बिहार में राजस्व न्यायालयों के कामकाज को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम फैसला लिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 07 जुलाई को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब राजस्व न्यायालयों में किसी भी वाद की सुनवाई के दौरान भौतिक दस्तावेज या साक्ष्य स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इस निर्णय से आम लोगों को अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
बिहार में बड़ा फैसला! अब राजस्व कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, घर बैठे होगा काम, जानें कैसे?
Bihar Revenue Court: राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब राज्य के राजस्व न्यायालयों में किसी भी वाद की सुनवाई के दौरान केवल ऑनलाइन साक्ष्य और दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भौतिक दस्तावेजों को जमा करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।






विभाग के सचिव जय सिंह ने इस संबंध में राज्य के सभी समाहर्ताओं, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं और अंचल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार, राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (आरसीएमएस) के तहत दायर किसी भी वाद में आवेदक या विपक्षी से अब कोई भी भौतिक साक्ष्य या कागज के दस्तावेज नहीं लिए जाएंगे।
अब नहीं काटने होंगे दफ्तरों के चक्कर, भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम
विभाग को लगातार यह जानकारी मिल रही थी कि ऑनलाइन आरसीएमएस व्यवस्था लागू होने के बावजूद कई स्थानों पर सुनवाई के दौरान पक्षकारों से भौतिक रूप से दस्तावेज लिए जा रहे थे। यह निर्धारित डिजिटल प्रक्रिया के बिल्कुल विपरीत था। इसे गंभीरता से लेते हुए, विभाग ने इस प्रथा पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है।
इस नए निर्देश के बाद, यदि सुनवाई के दौरान किसी अतिरिक्त साक्ष्य या दस्तावेज की आवश्यकता होती है, तो संबंधित पक्षकारों को उसे केवल आरसीएमएस पोर्टल पर ही अपलोड करने का निर्देश दिया जाएगा। सभी राजस्व न्यायालय अब केवल पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही वादों का निपटारा सुनिश्चित करेंगे। इस पहल से दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की संभावना समाप्त होगी और सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे।
मंत्री बोले- ‘पूरी न्यायिक प्रक्रिया होगी भ्रष्टाचारमुक्त’
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिहार सरकार राजस्व न्यायालयों को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक हितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि आरसीएमएस की व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ही पूरी न्यायिक प्रक्रिया को ऑनलाइन, जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है।
‘बिहार सरकार राजस्व न्यायालयों को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक हितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आरसीएमएस की व्यवस्था का उद्देश्य ही यह है कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया ऑनलाइन, जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त हो। किसी भी स्तर पर भौतिक दस्तावेज लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।’
‘सभी अधिकारी निर्धारित व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। इससे आम नागरिकों को अधिक सुविधा मिलेगी, अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर समाप्त होंगे और न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।’
सचिव जय सिंह ने सभी जिला और अंचल स्तरीय अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, ताकि राज्य में राजस्व न्यायालयों की ऑनलाइन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी ढंग से लागू हो सके। इस कदम से नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने और कागजी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
राजस्व न्यायालयों में भौतिक दस्तावेज पर रोक
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने राज्य के सभी समाहर्ताओं, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं और अंचल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के मुताबिक, राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (आरसीएमएस) के तहत दायर किसी भी वाद की सुनवाई के दौरान आवेदक या विपक्षी से भौतिक रूप से कोई भी दस्तावेज नहीं लिया जाएगा। विभाग को जानकारी मिल रही थी कि कई जगहों पर निर्धारित ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद पक्षकारों से भौतिक दस्तावेज मांगे जा रहे थे, जिसे गंभीरता से लेते हुए यह रोक लगाई गई है।
अब यदि किसी अतिरिक्त साक्ष्य या दस्तावेज की आवश्यकता होती है, तो संबंधित पक्षकारों को उसे केवल आरसीएमएस पोर्टल पर ही अपलोड करने का निर्देश दिया जाएगा। सभी राजस्व न्यायालय केवल पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही मामलों का निपटारा सुनिश्चित करेंगे।
पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्ति का नया अध्याय
इस फैसले से राजस्व न्यायालयों की पूरी प्रक्रिया में अभूतपूर्व पारदर्शिता आएगी। दस्तावेजों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या विवाद की आशंका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, क्योंकि सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे। सबसे बड़ा फायदा आम नागरिकों को होगा, जिन्हें अब कागजी दस्तावेज जमा करने या बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा, “बिहार सरकार राजस्व न्यायालयों को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक हितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आरसीएमएस की व्यवस्था का उद्देश्य ही यह है कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया ऑनलाइन, जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त हो। किसी भी स्तर पर भौतिक दस्तावेज लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। सभी अधिकारी निर्धारित व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। इससे आम नागरिकों को अधिक सुविधा मिलेगी, अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर समाप्त होंगे और न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।”
सचिव जय सिंह ने सभी जिला एवं अंचल स्तरीय अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, ताकि राज्य में राजस्व न्यायालयों की ऑनलाइन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी रूप से लागू हो सके और आम जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके।








