Bihar Police Firing: बिहार के मधुबनी जिले में बलिराजगढ़ गोलीकांड के आरोपी एएसआई चंद्रमोहन सिंह को पकड़ना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। घटना के 60 घंटे बीत जाने के बाद भी आरोपी एएसआई पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इस सनसनीखेज Bihar Police Firing मामले में अब तक 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए बिहार, अन्य राज्यों और नेपाल में 12 विशेष टीमें छापेमारी कर रही हैं।

‘बलिराजगढ़ में घटित घटना ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ है. यह अपराध अक्षम्य है. आरोपी चंद्रमोहन सिंह अब पुलिस महकमे के लिए पुलिसकर्मी नहीं है, बल्कि अपराधी है”. – योगेंद्र कुमार, एसपी
पुलिस ने इस मामले में कठोर कार्रवाई करते हुए ड्यूटी में लापरवाही और समय पर सूचना न देने के आरोप में एक चौकीदार समेत 5 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए कर्मियों में बलिराजगढ़ पिकेट के चार सैप जवान भी शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी की सेवा से बर्खास्तगी के लिए संबंधित स्तर पर पत्राचार भी शुरू कर दिया है। एसएसपी योगेंद्र कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपी एएसआई को फांसी की सजा दिलाने के लिए पुलिस हरसंभव कदम उठा रही है।
गोलीकांड की पूरी कहानी: कैसे हुई घटना?
एसएसपी योगेंद्र कुमार ने कहा, ‘एएसआई चंद्रमोहन सिंह की गिरफ्तारी के लिए 12 विशेष टीमें जुटी हैं। इनमें चार टीमें नेपाल भी भेजी गई हैं। एएसआई को फांसी की सजा दिलाने को सभी कदम पुलिस उठा रही है।’
2 नवंबर की रात करीब 11:53 बजे बलिराजगढ़ के धत्ता टोल में यह घटना हुई थी। पुलिस को डायल 112 के माध्यम से सूचना मिली थी कि ग्रामीणों ने एक पुलिस अधिकारी को घर में बंद कर रखा है। जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो वहां अफरातफरी का माहौल था और चार लोग गोली लगने से गंभीर रूप से जख्मी पड़े थे। ग्रामीणों के हवाले से दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, बलिराजगढ़ उत्खनन स्थल की सुरक्षा में तैनात एएसआई चंद्रमोहन सिंह धत्ता टोल स्थित एक महिला के घर में घुस गए थे। ग्रामीणों ने उन्हें घर में बंद कर दिया। एएसआई ने खिड़की के रास्ते बाहर निकलने की कोशिश की और रोके जाने पर अपनी सर्विस पिस्टल से चार राउंड अंधाधुंध गोलियां चला दीं।
इस गोलीबारी में 45 वर्षीय अशोक यादव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 55 वर्षीय विजेंद्र यादव उर्फ विजुन यादव, 60 वर्षीय धनिकलाल यादव और 40 वर्षीय फूलो देवी गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को बाबूबरही सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल मधुबनी भेजा। इस घटना को लेकर एएसआई चंद्रमोहन सिंह के खिलाफ दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पहली प्राथमिकी डायल 112 में प्रतिनियुक्त एसआई राम मनोहर सिंह के आवेदन पर दर्ज हुई, जिसमें एएसआई पर ग्रामीणों पर फायरिंग, हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप लगाए गए हैं। दूसरी प्राथमिकी मृतक अशोक यादव की पत्नी अस्मिता देवी के आवेदन पर हत्या के आरोप में दर्ज की गई है।
घायलों की स्थिति और पुलिस की कार्रवाई
गोलीकांड में गंभीर रूप से जख्मी विजेंद्र यादव को डीएमसीएच से आईजीआईएमएस पटना रेफर किया गया है, जहां उनकी गर्दन में गोली लगी थी। वहीं, कृष्णदेव यादव की पत्नी फूलो देवी, जिनके पेट में गोली लगी थी, का इलाज दरभंगा के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। गोवर्धन यादव के पुत्र धनिकलाल यादव के पैर में गोली लगी है और उनका इलाज सदर अस्पताल मधुबनी में जारी है। एसएसपी योगेंद्र कुमार ने बताया कि विजेंद्र और फूलो देवी की हालत में अब सुधार है। पुलिस प्रशासन की ओर से घायलों के लिए जरूरी रक्त की व्यवस्था भी कराई गई है।
एसएसपी ने एएसआई की गिरफ्तारी में सूचना देने वाले के लिए 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की है। जिला मजिस्ट्रेट आनंद शर्मा ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जिला जज को सौंप दी है, जो इस गंभीर घटना की न्यायिक जांच में महत्वपूर्ण होगी। इस घटना ने बलिराजगढ़ के ऐतिहासिक गढ़ परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि खनन स्थल की सुरक्षा के लिए बनाया गया पिकेट घटना के बाद से पूरी तरह खाली पड़ा है।
यह घटना पुलिसकर्मियों द्वारा आम नागरिकों पर की गई कार्रवाई की गंभीरता को उजागर करती है और बिहार पुलिस की छवि पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। प्रशासन की ओर से आरोपी को पकड़ने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए तेज प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।








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