बिहार के सरकारी स्कूलों पर लगाम : शिक्षकों के रील्स बनाने पर सख्त रोक, अब नहीं दिखेंगे क्लासरूम वीडियो। शिक्षा विभाग के प्रशासन निदेशक विजय कुमार पांडेय ने बुधवार को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) को इस बाबत निर्देश भेजे हैं। पिछले सप्ताह ही वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सीके अनिल ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) का पदभार संभाला है। उनके एसीएस बनने के बाद से विभाग में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।

Bihar Teachers: सरकारी स्कूलों में अब बिहार के शिक्षक और अन्य स्टाफ न तो रील बना पाएंगे और न ही क्लासरूम के अंदर वीडियो शूट कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर सकेंगे। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में बुधवार को एक सख्त निर्देश जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि स्कूल परिसर में सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए अब लिखित अनुमति लेनी अनिवार्य होगी।
विभाग ने इस नए नियम के पीछे बच्चों की निजता और उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का हवाला दिया है। इसके साथ ही, शिक्षकों के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर बनने की कोशिशों पर भी गहरी आपत्ति जताई गई है, क्योंकि इससे पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है।
बच्चों की निजता और पढ़ाई की सुरक्षा सर्वोपरि
शिक्षा विभाग के प्रशासन निदेशक विजय कुमार पांडेय ने बुधवार को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) को इस बाबत निर्देश भेजे हैं। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि विद्यालय परिसर में शिक्षण कार्य के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा वीडियो बनाने या बच्चों के साथ रील शूट करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी शिक्षक या कर्मी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में कहा है, ‘शिक्षण कार्य के दौरान बच्चों के साथ रील बनाना और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। यह बच्चों की निजता और जीवन के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है।’
इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशकों और सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सौंपी गई है।
क्लासरूम में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर बनने पर आपत्ति
विभाग ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि कई शिक्षक, जिनमें महिला शिक्षिकाएं भी शामिल हैं, कक्षा में पढ़ाते समय रील्स बनाकर उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करती हैं। यह प्रवृत्ति शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों द्वारा विद्यालय परिसर में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर बनने की कोशिश का नतीजा है। सरकार ने इस रवैये को बेहद अनुचित बताया है।
विभाग का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल बच्चों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित होती है, बल्कि सरकारी कार्य के प्रति लापरवाही भी खुलकर सामने आती है। यह शैक्षणिक माहौल के लिए कतई ठीक नहीं है।
एसीएस सीके अनिल के आने के बाद लगातार बदलाव
यह नया प्रतिबंध शिक्षा विभाग में हालिया बदलावों की कड़ी में एक और कदम है। पिछले सप्ताह ही वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सीके अनिल ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) का पदभार संभाला है। उनके एसीएस बनने के बाद से विभाग में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। सीके अनिल विशेष रूप से स्कूलों में तैनात शिक्षकों और कर्मचारियों के कामकाज को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं।
इस प्रतिबंध से पहले, बीते शनिवार को ही शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के जींस-टीशर्ट जैसे परिधान पहनकर स्कूल आने पर भी रोक लगा दी थी। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को केवल औपचारिक परिधान (फॉर्मल ड्रेस) में ही विद्यालय आने की अनुमति दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जींस-टीशर्ट पहनकर आने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद है कि आने वाले समय में शिक्षा विभाग से इस तरह के और भी आदेश जारी हो सकते हैं, जिनका मकसद शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार लाना है।






