Bhagalpur Ganga Katav: भागलपुर में गंगा नदी का भीषण कटाव अब विकराल रूप ले चुका है। जिले के सबौर प्रखंड अंतर्गत राघोपुर काजीकोरिया पंचायत में गंगा की लहरों ने करीब 50 परिवारों के आशियाने छीन लिए हैं। महादेवपुर घाट के पास 125 मीटर लंबा तटबंध कटाव की तीव्र चपेट में है, जिससे इलाके में जबरदस्त दहशत फैल गई है। प्रसिद्ध ब्रह्म बाबा मंदिर का एक हिस्सा भी नदी में समाने की कगार पर पहुँच गया है।
स्थानीय लोगों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि जिंदगी भर की कमाई से घर बनाया था, जिसे गंगा की लहरों ने छीन लिया। कई परिवार बेघर हो गए हैं और दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाया है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि कटाव रोकने के लिए तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने पर विवश होंगे।
गंगा नदी के कटाव प्रभावित क्षेत्र का जिला पदाधिकारी ने किया स्थल निरीक्षण
भागलपुर जिलान्तर्गत खरीक प्रखंड के राघोपुर स्थित महादेवपुर घाट के समीप गंगा नदी के किनारे हुए कटाव की घटना के मद्देनजर आज जिला पदाधिकारी, भागलपुर द्वारा अन्य वरीय पदाधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी, नौगछिया एवम संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारियों सहित अन्य संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में कटाव प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया गया इस दौरान घटनास्थल पर चल रहे कटाव निरोधी एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों की जानकारी ली गई तथा प्रभावित क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का अवलोकन किया गया।
जिला पदाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों से कटाव की स्थिति, प्रभावित परिवारों एवं चल रहे बचाव कार्यों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। साथ ही, प्रभावित क्षेत्र में स्थिति पर सतत निगरानी रखने तथा आमजन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया गयाजिला प्रशासन द्वारा संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
करोड़ों के कटाव निरोधी काम पर उठे गंभीर सवाल
गंगा नदी के कटाव से हो रही तबाही के बीच, पूर्व में हुए कटाव निरोधी कार्यों (फ्लड फाइटिंग) पर खर्च की गई सरकारी राशि को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीण और जनप्रतिनिधि पूर्व में हुए कामों की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। कटाव रोकने के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। उन्होंने सरकार और जल संसाधन विभाग से योजनाओं और खर्च का पूरा विवरण (श्वेत पत्र) जनता के सामने रखने की मांग की है।
प्रशासन अलर्ट, सुरक्षित आश्रय स्थलों की व्यवस्था
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाके में सुरक्षात्मक और कटाव निरोधी कार्यों में तेजी लाई गई है। बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से गंगा के कटाव को रोकने के लिए सैंड बैग और जियो बैग डालने का काम जारी है। संभावित खतरे को देखते हुए, आपदा प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थलों (रिलीफ कैंप) की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सके।







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