Bihar bullet train route के तहत प्रस्तावित नॉर्दर्न हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर Bihar के आठ जिलों से होकर गुजरेगा, जिससे राज्य के यात्रियों को तेज गति वाली परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड इस महत्वाकांक्षी परियोजना का रूट अलाइनमेंट तैयार कर रहा है, जिसके जरिए दिल्ली से गुवाहाटी तक हाई-स्पीड ट्रेन नेटवर्क बिछाने की योजना है।
बिहार में किन 8 जिलों से गुजरेगा कॉरिडोर
प्रस्तावित 1550 किलोमीटर लंबे दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के नक्शे में बिहार के आठ प्रमुख जिलों को शामिल किया गया है। इनमें बक्सर, भोजपुर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज के नाम सामने आए हैं। इस रूट पर चलने वाली ट्रेनें जापानी शिंकानसेन तकनीक पर आधारित होंगी और 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक दौड़ सकती हैं।
इन पांच जगहों पर बन सकते हैं स्टेशन
अधिकारियों द्वारा तैयार शुरुआती प्रस्ताव के मुताबिक, राज्य के भीतर पांच प्रमुख जगहों पर बुलेट ट्रेन के स्टेशन बनाए जा सकते हैं। इनमें पटना के अलावा बक्सर, बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार शामिल हैं। हालांकि, इन स्टेशनों की अंतिम जगहों और नामों को अभी मंजूरी मिलना बाकी है। आरा, पूर्णिया और किशनगंज से भी यह कॉरिडोर गुजरेगा, लेकिन वहां नियमित ठहराव होगा या नहीं, इसका निर्णय विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर और सर्वे पूरा होने के बाद ही लिया जाएगा।
पटना में एम्स के पास स्टेशन की चर्चा
राजधानी पटना में बुलेट ट्रेन के लिए फुलवारीशरीफ स्थित एम्स के आसपास की जमीन पर विचार चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंजूर किए गए इस नॉर्दर्न हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी जैसे महानगर जुड़ेंगे।
| विवरण | संभावित विवरण |
|---|---|
| शामिल जिले | बक्सर, भोजपुर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज |
| प्रस्तावित स्टेशन | पटना (एम्स के पास), बक्सर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार |
| कॉरिडोरा लंबाई | लगभग 1550 किमी (दिल्ली से गुवाहाटी) |
| तकनीक | जापानी शिंकानसेन (320 किमी/घंटा रफ्तार) |
परियोजना के निर्माण के दौरान उपजाऊ भूमि और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से गुजरने के कारण भूमि अधिग्रहण और नदियों पर बड़े पुलों का निर्माण बड़ी चुनौती साबित होगा। अंतिम रूप से स्टेशनों के ठहराव और निर्माण की रूपरेखा सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगी।







