Agra Air Pollution का खतरा दीपावली से पहले ही शहर में गहराने लगा है, जिससे Agra और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। बुधवार को शहर के कई हिस्सों में धूल का गुबार छाया रहा और हवा में घुले अति सूक्ष्म कणों की मात्रा मानकों से कई गुना अधिक दर्ज की गई। इस स्थिति के चलते बुजुर्गों, बच्चों, रोगियों के साथ-साथ स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
संजय प्लेस और आवास विकास कॉलोनी में हवा बेहद खराब
बुधवार को शहर के विभिन्न इलाकों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग रिकॉर्ड किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा निर्धारित मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के मुकाबले हवा में अति सूक्ष्म कणों की मात्रा कई गुना अधिक पाई गई। शहर के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय इलाकों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
| इलाका / क्षेत्र | अति सूक्ष्म कणों की स्थिति | मुख्य स्थिति / विवरण |
|---|---|---|
| संजय प्लेस | 380 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर | शहर में सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र, बहुत खराब स्थिति |
| सेक्टर तीन-बी आवास विकास कॉलोनी | 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक | बहुत खराब वायु गुणवत्ता |
| रोहता | 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक | बहुत खराब वायु गुणवत्ता |
| शाहजहां गार्डन | 285 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (धूलकण) | धूलकणों की मात्रा में बढ़ोतरी, खराब स्थिति |
| मनोहरपुर | 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक | खराब स्थिति |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहर के बड़े हिस्से में हवा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है, जिससे आम जनता का स्वास्थ्य दांव पर लग गया है।
प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश
हवा के बहाव की गति धीमी होने के कारण धूलकण और अति सूक्ष्म कण वातावरण में स्थिर हो गए हैं, जिसके चलते धूप भी हल्की रही। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि नगर निगम को सड़कों के किनारे जमी धूल हटाने और पानी का छिड़काव बढ़ाने के लिए पत्र भेजा गया है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के नियमों का पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मण्डलायुक्त रितु माहेश्वरी की अध्यक्षता में हुई टीटीजेड अथॉरिटी की बैठक में आगरा में पूरे साल ग्रैप लागू करने के निर्देश दिए गए थे, ताकि बढ़ते प्रदूषण पर समय रहते अंकुश लगाया जा सके।
मौसम में बदलाव, कम तापमान, कम हवा की गति और कृषि अपशिष्ट जलाए जाने जैसी वजहों से हर साल अक्टूबर से मार्च के बीच स्थिति और गंभीर हो जाती है। हालांकि, नगर निगम को छोड़कर अन्य संबंधित विभागों द्वारा इस दिशा में आवश्यक और त्वरित कदम नहीं उठाए जाने से चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।







