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बिहार में भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ फेल! CM सम्राट चौधरी को दिल्ली तक दौड़ क्यों लगानी पड़ी? | पढ़िए – फिश पॉलिटिक्स और नदियों का पुनर्जीवन!

Bihar Cabinet: पंजाब में AAP विधायकों को तोड़ने वाली बीजेपी बिहार में चूक गई। दो निर्दलीय MLC को पार्टी में शामिल करने की कोशिश से JDU इतनी नाराज हुई कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को दिल्ली तक दौड़ लगानी पड़ी, जिससे सियासी दांव उल्टा पड़ गया।

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Bihar Cabinet: बिहार कैबिनेट की सियासत में इन दिनों ‘ऑपरेशन लोटस’ की चर्चा जोरों पर है, जिसने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बैकफुट पर ला दिया है। इस फिश पॉलिटिक्स में पंजाब में आम आदमी पार्टी के विधायकों को तोड़ने में सफल रही भाजपा को बिहार में बड़ा झटका लगा है। दो निर्दलीय एमएलसी को पार्टी में शामिल करने की कोशिश ने सहयोगी दल जेडीयू को इतना नाराज कर दिया कि पूरा सियासी खेल ही पलट गया।

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हाल ही में निर्दलीय एमएलसी चुनाव जीतने वाले राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के भाजपा में शामिल होने की खबरें सामने आई थीं। इन दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उनके भाजपा की सदस्यता लेने की अटकलें तेज हो गईं।

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इस घटनाक्रम ने सहयोगी दल जेडीयू को खासा नाराज कर दिया। तिरहुत स्नातक क्षेत्र से चुनाव हारे जेडीयू नेता अभिषेक झा ने भाजपा पर भीतरघात का सीधा आरोप लगाते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का ऐलान कर दिया। यह कदम गठबंधन के भीतर बढ़ती तनातनी का स्पष्ट संकेत था।

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दिल्ली में हाईकमान का सख्त निर्देश, सीएम पर दबाव

सियासी तनातनी के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सोमवार को तत्काल दिल्ली रवाना हुए। वहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई शीर्ष केंद्रीय नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, भाजपा हाईकमान ने सीएम चौधरी को जेडीयू नेताओं की नाराजगी तुरंत दूर करने का सख्त निर्देश दिया, जिससे उन पर दबाव बढ़ गया।

इसके बाद सम्राट चौधरी और जेडीयू के शीर्ष नेताओं के हस्तक्षेप से फोन पर बातचीत हुई, जिसके परिणामस्वरूप अभिषेक झा की बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस टाल दी गई। इस बीच, दल-बदल कानून के पेच को समझते हुए निर्दलीय एमएलसी राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के सुर भी पूरी तरह बदल गए हैं। पहले जो नेता शिक्षकों के हित में भाजपा में शामिल होने की बात कह रहे थे, अब वे सिर्फ बाहर से समर्थन देने का दावा कर रहे हैं।

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दल-बदल कानून का पेंच और विपक्ष का हमला

राजनीतिक गलियारों में एक दलील यह भी दी जा रही है कि अगर कोई निर्दलीय जीता हुआ जनप्रतिनिधि किसी पार्टी की सदस्यता लेता है, तो कानून के तहत उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है। इस मामले में विपक्ष ने भी सत्ता पक्ष को घेरना शुरू कर दिया है। राजद नेता तेजस्वी यादव और जन सुराज ने दोनों एमएलसी की सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई है।

जन सुराज के नेता किशोर कुमार मुन्ना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने विधान परिषद के सभापति रामवचन राय से मुलाकात कर इस संबंध में त्वरित कार्रवाई की अपील की है। यह प्रकरण भाजपा के लिए एक बड़ी सीख साबित हुआ है।

गठबंधन में कड़वाहट, जेडीयू का भाजपा पर सीधा आरोप

जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘जिन बागी नेताओं ने चुनाव में जेडीयू उम्मीदवारों को हराया, उन्हें बीजेपी वापस सम्मानित क्यों कर रही है।’

जेडीयू खेमे का मानना है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने के बाद भाजपा उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। यह घटनाक्रम गठबंधन के भीतर अविश्वास की खाई को और गहरा करता दिख रहा है।

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हालिया चुनावों में मिली हार के बाद भाजपा विधान परिषद में अपना संख्या बल बढ़ाना चाहती थी। बांकीपुर विधानसभा और पटना एमएलसी सीट गंवाने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी केंद्रीय नेतृत्व को यह संदेश देना चाहते थे कि बिहार में पार्टी मजबूत हो रही है। हालांकि, सहयोगी जेडीयू की तीखी प्रतिक्रिया और दल-बदल कानून के खतरे को देखते हुए फिलहाल इस ‘ऑपरेशन लोटस’ पर ब्रेक लग गया है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बिहार की राजनीति पर देखने को मिल सकते हैं।

इधर, नदियों का पुनर्जीवन, बिहार का नव निर्माण!

नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए। “नदी संजीवनी” पहल से नदियों की गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ेगी और निकाली गई गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में किया जाएगा।

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