Bihar Crocodile: बिहार के सुपौल जिले में मंगलवार सुबह एक बड़ा बिहार मगरमच्छ सड़क पर आ जाने से हड़कंप मच गया। वीरपुर थाना क्षेत्र के बसंतपुर वार्ड नंबर 1 स्थित खोंटहा गांव में करीब आठ फीट लंबा मगरमच्छ अहले सुबह सड़क पर घूमता दिखा। सुबह लगभग साढ़े चार बजे स्थानीय लोगों की नजर इस विशालकाय सरीसृप पर पड़ी, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत आसपास के घरों में सूचना दी और भीमनगर थाना के साथ वन विभाग को भी जानकारी दी गई।
सड़क पर मगरमच्छ देख जुटी भीड़, रेस्क्यू में आई चुनौती
मगरमच्छ दिखने की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते सड़क पर भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही भीमनगर थानाध्यक्ष मनीष कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके कुछ देर बाद वीरपुर वन विभाग की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई। इतने बड़े आकार के मगरमच्छ को पकड़ना आसान नहीं था, जिससे बचाव अभियान शुरू करने में चुनौती आई। वन विभाग की टीम के पास इतने बड़े जीव को पकड़ने के लिए उपयुक्त जाल मौजूद नहीं था।
तत्काल राघोपुर स्थित वन विभाग कार्यालय से एक बड़ा जाल मंगाया गया। जाल पहुंचने के बाद वन विभाग के कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत और सावधानी के बाद मगरमच्छ को सफलतापूर्वक जाल में फंसा लिया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मगरमच्छ लगभग आठ फीट लंबा था, और उसकी ताकत को देखते हुए उसे पकड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
कोसी नदी में छोड़ा गया मगरमच्छ, लोगों में डर का माहौल
मगरमच्छ को पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित रूप से जाल में बांधा गया। इसके बाद एक ट्रैक्टर पर रखकर उसे कोसी नदी ले जाया गया, जहां उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इस पूरे रेस्क्यू अभियान के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और कौतूहल से इस घटनाक्रम को देखते रहे। बचाव कार्य के दौरान मगरमच्छ की फुफकार सुनकर कई लोग डर गए। कुछ ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि उन्होंने मगरमच्छ को लोमड़ी खाते हुए देखा था, जिससे उसका वजन बढ़ गया था और वह तेजी से चल नहीं पा रहा था, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुसहा त्रासदी के बाद बढ़ी संख्या, सतर्क रहने की अपील
वन विभाग के कर्मियों के अनुसार, वर्ष 2008 की कुसहा त्रासदी के बाद से इस इलाके में मगरमच्छों की संख्या बढ़ने की बात सामने आती रही है। इसी कारण अब ये जलीय जीव अपने प्राकृतिक क्षेत्र से निकलकर आबादी वाले और आवासीय इलाकों तक पहुंचने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग हर महीने क्षेत्र में मगरमच्छ दिखने की सूचना मिलती रहती है, जिससे उनमें भय का माहौल है।
वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग के अनुसार, मगरमच्छ एक जंगली जीव है और इसके करीब जाना खतरनाक हो सकता है। नदी, तालाब और अन्य जलजमाव वाले इलाकों के आसपास लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर बच्चों को अकेले पानी वाले क्षेत्रों के पास नहीं जाने देने की सलाह दी गई है ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके।







