Bihar Disaster Management: नेपाल में हाल ही में आई त्रासदी और बाढ़ के दौरान संचार व्यवस्था ठप होने की बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य में आपदा के समय संचार को मजबूत करने के लिए 4G और 5G नेटवर्क को सैटेलाइट-आधारित गैर-स्थलीय नेटवर्क (NTN) से जोड़ने की तैयारी चल रही है। प्राधिकरण के एक अधिकारी के अनुसार, यह प्रस्ताव नेपाल की हालिया घटना से पहले ही विचाराधीन था।
इस प्रस्तावित प्रणाली का उद्देश्य पारंपरिक मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क के बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अनुपलब्ध होने पर एक संचार बैकअप प्रदान करना है। सैटेलाइट नेटवर्क मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए एक मजबूत बैकअप के रूप में कार्य करेगा।
आपदा में क्यों जरूरी है सैटेलाइट संचार?
बाढ़, भूकंप, चक्रवात और अन्य आपात स्थितियों के दौरान मोबाइल टावर और स्थलीय संचार प्रणालियाँ बाधित हो सकती हैं। बिजली गुल होने, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचने या टावरों से कनेक्टिविटी समाप्त होने से मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं में व्यापक व्यवधान आ सकता है।
प्रस्तावित दृष्टिकोण के तहत, सैटेलाइट-आधारित कनेक्टिविटी का उपयोग करने वाले गैर-स्थलीय नेटवर्क मौजूदा 4G और 5G बुनियादी ढांचे के पूरक होंगे। यह प्रभावित क्षेत्रों में संचार बनाए रखने में मदद करेगा। ऐसी प्रणाली बिहार के बाढ़-प्रवण जिलों में विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है, जहाँ संचार में व्यवधान राहत और बचाव कार्यों को जटिल बना देता है।
कौन-कौन से विभाग करेंगे समन्वय?
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इस प्रणाली को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और दूरसंचार विभाग के बीच औपचारिक समन्वय का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) को भी प्रस्तावित समन्वय तंत्र में शामिल किया जा सकता है।
इसका मुख्य उद्देश्य एक अधिक मजबूत और विश्वसनीय संचार नेटवर्क बनाना है, जो पारंपरिक बुनियादी ढांचे के क्षतिग्रस्त होने पर भी कार्य करने में सक्षम हो।
राहत और बचाव कार्यों के लिए कितना महत्वपूर्ण?
किसी आपदा के दौरान संचार बनाए रखना प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य अधिकारियों और राहत एवं बचाव टीमों के बीच समन्वय के लिए आवश्यक है। सैटेलाइट-समर्थित नेटवर्क यह सुनिश्चित करने में भी मदद कर सकता है कि जिन क्षेत्रों में स्थलीय संचार बुनियादी ढाँचा बाधित हो गया है, वहाँ जनता सरकारी एजेंसियों से जुड़ी रहे।
प्राधिकरण ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के जिलाधिकारियों से इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने और आपदा के समय संचार प्रणालियों को मजबूत करने के लिए अपने सुझाव प्रदान करने का आग्रह किया है। इस पहल का उद्देश्य कनेक्टिविटी की एक अतिरिक्त परत बनाना है, जो बिहार की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली का समर्थन कर सके, जब बाढ़ या अन्य आपात स्थिति पारंपरिक संचार बुनियादी ढांचे पर दबाव डालती है।
यह पहल बिहार की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली को एक नई मजबूती प्रदान करेगी, जिससे भविष्य में आने वाली किसी भी आपात स्थिति में संचार की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा। जिलाधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि राज्य के हर कोने में आपदा के समय भी संपर्क बना रहे।







