Bihar Flood: राज्य में मानसून के फिर से सक्रिय होने के बीच बिहार में बाढ़ की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन नदियों तथा बैराजों पर लगातार पैनी नजर रख रहे हैं। 4 सितंबर 2026 की सुबह जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य की प्रमुख नदियों में जलस्तर अलग-अलग रुख दिखा रहा है, जिससे कई इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
इंद्रपुरी स्थित सोन बैराज से पानी का डिस्चार्ज अभी भी अत्यधिक ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर सुबह 8:28 बजे तक बैराज से 4,37,478 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। इससे पहले 3 सितंबर की शाम तक यह आंकड़ा 5.59 लाख क्यूसेक तक पहुंच चुका था। बैराज के सभी 69 गेट खोल दिए गए हैं ताकि अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से निचले क्षेत्रों में भेजा जा सके और दबाव कम किया जा सके।
पटना में गंगा का विकराल रूप! क्या टूट जाएगा 49 साल पुराना रिकॉर्ड? CM ने दिए कड़े निर्देश
Bihar Flood: राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और आशंका है कि यह जल्द ही अपने 49 साल पुराने उच्चतम रिकॉर्ड को तोड़ सकती है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को अलर्ट रहने के कड़े निर्देश दिए।
दीघा और गांधी घाट पर रिकॉर्ड तोड़ने को बेताब गंगा
गंगा नदी पटना के प्रमुख घाटों पर अपने ऐतिहासिक जलस्तर के बेहद करीब पहुंच गई है। दीघा घाट पर वर्ष 1975 में 52.52 मीटर का उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया था। गुरुवार शाम छह बजे तक यहां जलस्तर 51.64 मीटर तक पहुंच गया, जो पुराने रिकॉर्ड से सिर्फ 88 सेंटीमीटर कम है। विशेषज्ञों ने शुक्रवार तक इसमें और बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
गांधी घाट पर भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। वर्ष 2016 में यहां गंगा का सर्वाधिक जलस्तर 50.52 मीटर था। गुरुवार शाम छह बजे तक नदी का जलस्तर 50.31 मीटर दर्ज किया गया, जो पुराने रिकॉर्ड से महज 21 सेंटीमीटर नीचे है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की आशंका को गहरा दिया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का त्वरित एक्शन: अधिकारियों को कड़े निर्देश
गंगा नदी में बढ़ते जलस्तर के मद्देनजर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों का गहन स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजनों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा:
प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे और स्थानीय लोगों के साथ समन्वय बनाकर किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करे।
उन्होंने एसडीआरएफ (SDRF) और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दलों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटा जा सके।
बेंगलुरु से लौटते ही हवाई सर्वेक्षण और उच्चस्तरीय बैठक
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को बेंगलुरु से लौटने के तुरंत बाद बाढ़ की स्थिति का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। दोपहर एक बजे प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद, वे दोपहर दो बजे एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में नदियों के जलस्तर की वर्तमान स्थिति, तटबंधों की मजबूती और सुरक्षा उपायों, संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान और राहत-बचाव की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
बाढ़ प्रभावितों के लिए अग्रिम व्यवस्था और सुरक्षित आश्रय स्थल
मुख्यमंत्री ने संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों में सुरक्षित आश्रय स्थल चिह्नित करने और वहां सभी आवश्यक तैयारियां पूरी रखने पर जोर दिया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि चिकित्सा सुविधा, स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि स्थिति बिगड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल राहत और सहायता प्रदान की जा सके, और किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। सरकार Bihar Flood के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
बिहार में बाढ़ का बढ़ता संकट: गंगा और अन्य नदियां उफान पर
ऊपरी कैचमेंट एरिया से पानी की लगातार आवक के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेष रूप से मनेर, दानापुर, बख्तियारपुर और मोकामा के दियारा क्षेत्रों में स्थिति गंभीर होने की आशंका है। गंगा नदी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे किनारे बसे गांवों और शहरों में दहशत का माहौल है।
गंगा नदी गांधी घाट (पटना) पर खतरे के निशान से 1.61 मीटर ऊपर दर्ज की गई है, जो एक गंभीर स्थिति का संकेत है। हाथिदाह में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
अन्य प्रमुख नदियों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। कोसी नदी बल्टारा और कुर्सेला में, जबकि गंडक नदी दुमरियाघाट पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसी प्रकार, बूढ़ी गंडक भी खगड़िया में अपने खतरे के स्तर को पार कर चुकी है, जिससे इन क्षेत्रों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
प्रशासन की तैयारी और आगे की चुनौती
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दी गई हैं। तटबंधों पर कटाव और रिसाव की निगरानी भी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित घटना से बचा जा सके।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग का कहना है कि वे स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और आवश्यकता पड़ने पर डिस्चार्ज में बदलाव किया जाएगा। आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए, प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।








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