Bihar Fraud: झारखंड और बिहार सहित देश के 11 राज्यों में एक बड़े धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ‘राधास्वामी संगठन’ नामक एक संस्था पर सब्सिडी का लाभ दिलाने के नाम पर सैकड़ों लोगों से 150 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने का आरोप है। इस ठगी के मास्टरमाइंड दीपक कुमार शर्मा की कहानी बेहद चौंकाने वाली है, जिसने मजदूरी करते हुए अरबों की संपत्ति बनाई और आलीशान जीवनशैली अपनाई।
धार्मिक आड़ में फैला ठगी का जाल
राधास्वामी संगठन ने खुद को एक सामाजिक संस्था बताया, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा षड्यंत्र छिपा था। संगठन ने गाड़ियों, सामानों और फ्लैट पर भारी छूट दिलाने का लालच देकर हजारों लोगों को अपने जाल में फंसाया। अकेले पटना में ही 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी हुई है। दीपक कुमार शर्मा ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए एक धार्मिक नाम का इस्तेमाल किया और ‘कन्या दान योजना’, ‘वाहन योजना’, ‘आवास योजना’ और ‘निवेश योजना’ जैसी स्कीमों के नाम पर करोड़ों रुपये ठगे।
धीरे-धीरे दीपक ने अपने ठगी के नेटवर्क को पूरे मगध क्षेत्र में फैला दिया। पटना के जक्कनपुर और हनुमान नगर में सेंटर खोलने के बाद उसने जहानाबाद, अरवल, गया और नवादा में भी अपने केंद्र स्थापित किए। संगठन की वेबसाइट के अनुसार, 11 राज्यों में उसके 50,000 से अधिक एजेंट सक्रिय थे, जो लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे।
मजदूर से सांसद उम्मीदवार तक: दीपक शर्मा की आलीशान जिंदगी
ठगी का मास्टरमाइंड दीपक कुमार शर्मा मूल रूप से गया जिले के कोंच थाना क्षेत्र अंतर्गत गरारी पंचायत के औहालचक गांव का निवासी है। कभी गुजरात के सूरत में मजदूरी करने वाला 28 वर्षीय दीपक आज अरबों की संपत्ति का मालिक है। उसके पिता विमल कुमार शर्मा करीब तीन दशक पहले सूरत गए थे और वहां बढ़ई का काम करते थे। दीपक का जन्म भी सूरत में ही हुआ था और वह परिवार की मजदूरी में हाथ बंटाता था।
करीब 10 साल पहले दीपक का परिवार सूरत से पटना आकर बस गया। अपने पैतृक गांव से उसका संपर्क नाममात्र का ही था। गांव में उसका एक पुराना पक्का कमरा आज भी बंद पड़ा है। हाल के वर्षों में जब भी दीपक गांव आता था, तो स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर या थार जैसी महंगी गाड़ियों के काफिले में होता था। उसकी इस आलीशान जीवनशैली को देखकर ग्रामीण हैरान रह जाते थे, क्योंकि उसकी पृष्ठभूमि बेहद साधारण थी।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में दीपक कुमार शर्मा ने जहानाबाद संसदीय क्षेत्र से ‘राधास्वामी संगठन’ के नाम पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ा। हालांकि उसे मात्र 8970 वोट मिले और उसकी जमानत जब्त हो गई। चुनावी हलफनामे में उसने अपनी चल संपत्ति 1.74 करोड़ रुपये बताई थी, जिसमें फॉर्च्यूनर कार और दो महंगी बाइक शामिल थीं, लेकिन अचल संपत्ति के नाम पर कुछ नहीं दर्शाया। चुनाव हारने के बाद भी उसकी आर्थिक स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा। उल्टे, 2025 में उसने अपने पैतृक गांव औहालचक में 20 लाख रुपये का भुगतान कर एक बीघा कृषि भूमि खरीद ली, जिससे ग्रामीणों के बीच उसकी आय के स्रोत को लेकर सवाल उठने लगे।
पीड़ितों की आपबीती: ऐसे फंसाए गए आम लोग
इस धोखाधड़ी के कई शिकार सामने आए हैं, जिनकी आपबीती सुनकर लोग सिहर उठते हैं।
केस स्टडी-1: नवादा में कार का झांसा
नवादा के नारदीगंज थाना क्षेत्र के खेदुबिगहा निवासी मनोज कुमार ने 18 मार्च 2026 को शिकायत दर्ज कराई कि संगठन के जिला समन्वयक धर्मेंद्र कुमार ने उन्हें 6.50 लाख रुपये में अर्टिगा गाड़ी दिलाने का प्रलोभन दिया था। मनोज ने तय रकम का भुगतान कर दिया, लेकिन उन्हें गाड़ी नहीं मिली। दबाव बनाने पर आरोपी ने एक चेक दिया, जो बैंक में बाउंस हो गया।
केस स्टडी-2: नालंदा में ऑटो और निवेश के नाम पर ठगी
नालंदा जिले के तेल्हारा के खोजपुरा गांव के पीड़ित विकास कुमार ने बताया कि उनसे 4 लाख की ऑटो पर 40 प्रतिशत की छूट देकर लगभग 2.60 लाख रुपये लिए गए। उन्हें बताया गया कि राधास्वामी संगठन ही गाड़ी की ईएमआई भरेगा। विकास को ऑटो मिल गया और उन्होंने काम शुरू कर दिया। 12 महीने तक ईएमआई दी गई, लेकिन फिर बंद कर दी गई। जब वे मई में संगठन के कार्यालय गए, तो वह बंद मिला। विकास ने 5 लाख रुपये निवेश भी किए थे, जिस पर प्रतिमाह चार प्रतिशत ब्याज का वादा किया गया था। 10-12 महीने तक ब्याज मिला, लेकिन फिर वह भी बंद हो गया और उनका मूलधन लेकर संगठन के लोग फरार हो गए।
यह मामला दर्शाता है कि कैसे एक सामान्य मजदूर ने ठगी के दम पर करोड़ों की संपत्ति बनाई और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी पालीं। इस बड़े Bihar Fraud की जांच जारी है और पीड़ितों को न्याय का इंतजार है।







