Bihar High Court: बिहार हाईकोर्ट ने गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के निष्पादन से संबंधित एक रिपोर्ट पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सारण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट को असंतोषजनक मानते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया है। इस न्यायिक सख्ती ने पुलिस की कार्यप्रणाली और वारंट निष्पादन में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
न्यायाधीश अंसुल की एकलपीठ ने रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट का मानना है कि प्रस्तुत रिपोर्ट उन बुनियादी सवालों का जवाब देने में पूरी तरह विफल रही है, जो न्याय के हित में आवश्यक थे।






रिपोर्ट में दिखी खामियां, कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि एक वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में गैर-जमानती वारंट का निष्पादन बेहद असामान्य गति से किया गया। यह गति अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में लंबित वारंटों के निष्पादन की तुलना में कहीं अधिक थी। कोर्ट ने इस असमानता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रिपोर्ट में इन गंभीर मामलों में वारंट की स्थिति पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। यह विरोधाभास पुलिस की प्राथमिकता और कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है।
“प्रस्तुत रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देने में विफल रही है। एक वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में गैर-जमानती वारंट का निष्पादन असामान्य रूप से तेजी से किया गया, जबकि रिपोर्ट में अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में लंबित वारंटों की स्थिति पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।”
पारदर्शिता पर चिंता, पुलिस कार्यप्रणाली की होगी जांच
पटना हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट के इस आदेश से स्पष्ट है कि अब सारण एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर गैर-जमानती वारंटों के निष्पादन की पूरी प्रक्रिया और उसमें बरती गई कथित लापरवाही पर जवाब देना होगा। यह कदम न्यायपालिका की ओर से पुलिस जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कोर्ट का यह निर्देश अन्य जिलों में भी वारंट निष्पादन की प्रक्रिया की समीक्षा के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।








