Bihar Mutation: बिहार में जमीन म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब लोगों को अपने मृत पूर्वजों की जमीन का नामांतरण कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की नई व्यवस्था के तहत, राजस्व कर्मचारी (हल्का कर्मचारी) खुद गांव-गांव जाकर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे और मौके पर ही नामांतरण की प्रक्रिया शुरू कराएंगे।
इस नई पहल से उन लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जिनकी कीमती जमीन आज भी उनके मृत पूर्वजों के नाम पर कागजों में दर्ज है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य वर्षों से लंबित मृत रैयतों की जमाबंदियों को अद्यतन (अपडेट) करना है, जिससे ग्रामीण इलाकों में होने वाले भूमि विवादों को जड़ से खत्म किया जा सके।






सरकारी दफ्तरों के चक्कर खत्म: कैसे काम करेगा नया नियम?
समस्तीपुर सहित राज्य के सभी जिलों में यह नया नियम प्रभावी होगा। अब मृत पिता, दादा या अन्य पूर्वजों के नाम दर्ज जमाबंदियों को उनके वैध उत्तराधिकारियों के नाम स्थानांतरित कराने के लिए ग्रामीणों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। राजस्व कर्मचारी अपने आवंटित क्षेत्रों का सघन भ्रमण करेंगे और उन मामलों की पहचान करेंगे जहां मृत रैयत के नाम पर जमीन दर्ज है।
पहचान के बाद, कर्मचारी आवश्यक दस्तावेज मौके पर ही प्राप्त करेंगे और नामांतरण की प्रक्रिया को तत्काल शुरू कर देंगे। यह कदम बिहार में भूमि सुधार की दिशा में एक बड़ा बदलाव है, जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा।
मृत रैयतों की पहचान: विभाग की पुख्ता कार्ययोजना
इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक पुख्ता कार्ययोजना तैयार की है। जिले के सभी अंचलों में तैनात राजस्व कर्मचारी अपने-अपने क्षेत्रों में गहनता से काम करेंगे। विभाग ने मृत रैयतों की सटीक पहचान सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न माध्यमों से जानकारी जुटाने की रणनीति बनाई है, ताकि कोई भी पात्र परिवार इस सुविधा से वंचित न रहे।
यह पहल न केवल बिहार में भूमि संबंधी विवादों को कम करेगी, बल्कि जमीन के मालिकाना हक को भी स्पष्ट और पारदर्शी बनाएगी। आने वाले समय में यह व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध होगी।








