Bihar NHAI Guidelines: बिहार सहित पूरे देश में हाई स्पीड नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे के निर्माण में अब एकरूपता दिखेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इनकी डिजाइनिंग को लेकर नए और व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नए Bihar NHAI Guidelines का मुख्य उद्देश्य सड़क डिजाइन में एकरूपता लाना है, जिससे सुरक्षित और निर्बाध यातायात सुनिश्चित हो सके। अब हाईवे की लेन कॉन्फिगरेशन और चौड़ाई तय करने में ट्रैफिक की मात्रा को सबसे प्रमुख आधार बनाया जाएगा।
ट्रैफिक के हिसाब से तय होगी हाईवे की चौड़ाई
NHAI के नए प्रावधानों से सड़कों की क्षमता और उपयोगिता बढ़ेगी। सड़कों की चौड़ाई अब केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक ट्रैफिक घनत्व के अनुसार निर्धारित होगी:
- 15 हजार वाहनों तक के ट्रैफिक वाले कॉरिडोर में फोर लेन हाईवे और फोर लेन स्ट्रक्चर के लिए 60 मीटर चौड़ाई तय की गई है।
- 15 हजार से 25 हजार वाहनों के ट्रैफिक वाले कॉरिडोर में फोर लेन हाईवे और सिक्स लेन स्ट्रक्चर के साथ 70 मीटर चौड़ाई का प्रावधान रहेगा।
- 25 हजार से 40 हजार वाहनों के बीच ट्रैफिक वाले कॉरिडोर में सिक्स लेन हाईवे और सिक्स लेन स्ट्रक्चर के साथ 70 मीटर चौड़ाई निर्धारित की गई है।
यह बदलाव सड़कों को अधिक कुशल और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करेगा।
ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों प्रोजेक्ट पर लागू होंगे नियम
NHAI के अनुसार, इन नए दिशा-निर्देशों का लक्ष्य हाई स्पीड वाले नेशनल हाईवे कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में मानकों की एकरूपता लाना है। ये तकनीकी मानकों में स्थिरता, सड़क सुरक्षा में सुधार और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की परिचालन दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये नए नियम आगामी सभी फोर लेन और सिक्स लेन वाले ग्रीनफील्ड (नए सिरे से बनने वाले) और ब्राउनफील्ड (पुराने को अपग्रेड करने वाले) हाई स्पीड नेशनल हाईवे पर लागू होंगे।
डिजाइन में आएगी एकरूपता, बढ़ेगी सुरक्षा
पहले एक्सप्रेस-वे के अलावा हाई स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे की योजना और डिजाइन के लिए कोई अलग मानक मौजूद नहीं थे। इसी कारण कॉरिडोर की DPR तैयार करते समय अलग-अलग मानक अपनाए जाते थे, जिससे डिजाइन में काफी अंतर देखने को मिलता था। नए दिशा-निर्देशों से हाई स्पीड कॉरिडोर के डिजाइन और विकास में एकरूपता आने की उम्मीद है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
अवैध प्रवेश रोकने को बनेगी बाउंड्री वॉल, इंटरचेंज से मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
हाई स्पीड कॉरिडोर पर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। अनधिकृत प्रवेश और आवारा पशुओं को रोकने के लिए बाहरी किनारों पर एक मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, एक्सप्रेस-वे, नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और महत्वपूर्ण आर्टेरियल सड़कों के साथ क्रॉसिंग पर रैंप वाले इंटरचेंज बनाए जाएंगे। भारी ट्रैफिक वाले बंदरगाह, एयरपोर्ट, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक क्षेत्र और प्रमुख पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी देने वाली सड़कों पर भी इंटरचेंज का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है, जिससे यातायात सुगम बनेगा।
विकसित भारत 2047 के रोडमैप से जुड़ा प्लान
NHAI ने इन दिशा-निर्देशों को सरकार की दीर्घकालिक सड़क विकास रणनीति से जोड़ा है। ‘विकसित भारत 2047’ के तहत देश में 50 हजार किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई स्पीड कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना की गई है। NHAI का मानना है कि इन High-Speed Corridors के विकास से देश में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में भी मदद मिलेगी, जो आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।






