Bihar Panchayat Raj Officers: राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने वाले अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बिहार पंचायत सेवा संघ के आह्वान पर प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों (BPRO) और संबंधित संवर्ग के अधिकारियों ने सोमवार से काला बिल्ला लगाकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनकी स्पष्ट चेतावनी है कि यदि उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे, जिससे ग्रामीण स्तर पर कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
सामूहिक अवकाश की चेतावनी: सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम
बिहार पंचायत सेवा संघ के अध्यक्ष और वैशाली के प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी अजय कुमार चंद्र ने इस आंदोलन की अगुवाई की है। उन्होंने बताया कि सोमवार को पटना सहित पूरे बिहार में अधिकारियों ने काला बिल्ला लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन सरकार और पंचायती राज विभाग का ध्यान वर्षों से लंबित मांगों की ओर खींचने के लिए किया गया है। चंद्र ने साफ कहा है कि अगर दो दिनों के इस सांकेतिक विरोध के बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होती है, तो पंचायत सेवा संवर्ग के सभी अधिकारी सामूहिक अवकाश पर जाने पर विचार करेंगे।

अजय कुमार चंद्र ने कहा, “मांगें पूरी होने तक सांकेतिक विरोध जारी रहेगा। प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी पंचायती राज व्यवस्था को धरातल पर लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनके पद, अधिकार, संसाधन और सेवा संबंधी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।”
संघ ने अपनी मांगों को लेकर 8 सितंबर को पंचायती राज विभाग को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद 9 सितंबर को पटना में कार्यकारिणी की बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। 11 सितंबर को संघ ने विभाग को दोबारा मांग पत्र सौंपकर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की थी।
प्रमुख मांगें: राजपत्रित दर्जा और वित्तीय अधिकार
प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों की लंबी सूची में कई अहम मांगें शामिल हैं, जो उनके काम के दायरे और सम्मान से जुड़ी हैं। उनकी मुख्य मांगों में प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी के पद को राजपत्रित घोषित करना और उन्हें आवश्यक वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा, वे प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी को पुनः पंचायत समिति का कार्यपालक पदाधिकारी बनाने की मांग कर रहे हैं, ताकि पंचायत समिति के कार्यों के निष्पादन में जिम्मेदारी और स्पष्टता सुनिश्चित हो सके।
संघ ने पंचायत राज संवर्ग में वेतन और सेवा संबंधी विसंगतियों को दूर करने की भी मांग उठाई है। वे चाहते हैं कि प्रथम प्रोन्नति स्तर को लेवल-7 से लेवल-9 किया जाए, कैडर का पुनर्गठन हो और सभी लंबित प्रोन्नति मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाए। संघ का आरोप है कि विभागीय कार्यों और जिम्मेदारियों में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन इसके अनुरूप अधिकार और संसाधन नहीं बढ़ाए गए।
कार्यालयों के लिए संसाधन और स्वतंत्रता की मांग
अधिकारियों ने एसीईओ और एडीपीआरओ के पदों से संबंधित विभागीय प्रावधानों को जमीन पर उतारने की मांग की है। इसमें एडीपीआरओ को कार्यालय और वाहन उपलब्ध कराना, साथ ही पंचायतों के निरीक्षण और पंचायत राज व्यवस्था से जुड़े कार्यों की स्पष्ट जिम्मेदारी देना शामिल है। संघ ने विभागीय पदाधिकारियों को पर्याप्त प्रशासनिक एवं कार्यात्मक स्वतंत्रता देने और गैर-विभागीय पदाधिकारियों के अनावश्यक हस्तक्षेप को समाप्त करने की भी मांग की है।
प्रखंड पंचायत राज कार्यालयों के सुचारु संचालन के लिए उच्च वर्गीय लिपिक, निम्न वर्गीय लिपिक और अनुसेवक जैसे पदों के सृजन और तैनाती की भी मांग की गई है। कार्यालय संचालन के लिए अलग से कार्यालय व्यय की व्यवस्था और वाहन भुगतान सहित अन्य लंबित समस्याओं के समाधान की भी बात कही गई है।
संघ का कहना है कि वर्ष 2010 में बिहार पंचायत सेवा संवर्ग के गठन के बाद से अधिकारी पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन समय के साथ उनके अधिकार, संसाधन और सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ी हैं, जिससे उनमें असंतोष पनप रहा है। संघ ने सरकार से अपील की है कि वह सकारात्मक पहल कर प्रतिनिधिमंडल से वार्ता करे, ताकि सामूहिक अवकाश जैसे बड़े आंदोलन को टाला जा सके।







