Bihar Student Arrest: हाल ही में पटना में हुए छात्र प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई से आम जनजीवन में हड़कंप मच गया है। सैकड़ों परिवारों का दर्द जजेज आवास के बाहर सड़कों पर छलक उठा, जब उन्होंने अपने बेटों की रिहाई की गुहार लगाई। इन परिवारों का आरोप है कि उनके बच्चों को बेवजह गिरफ्तार किया गया और पुलिस हिरासत में उनके साथ बर्बरता की गई। एक पिता ने भावुक होकर बताया कि उनका बेटा सिर्फ दवा लेने घर से निकला था, लेकिन पुलिस ने उसे उठा लिया और इतना पीटा कि वह चल भी नहीं पा रहा है।
परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें हिरासत में लिए गए छात्रों के साथ मारपीट और उन्हें अपराधी जैसा व्यवहार देना शामिल है। उनका कहना है कि पुलिस ने उनके बच्चों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 और 121 लगाई है।






पुलिस पर बर्बरता और गलत जानकारी देने का आरोप
गिरफ्तार छात्रों के परिजनों का दावा है कि जब उन्हें बच्चों की गिरफ्तारी की खबर मिली, तो पुलिस ने उन्हें सही जानकारी नहीं दी। उन्हें गांधी मैदान थाना और राजीव नगर थाना के बीच भटकाया गया। परिजनों के अनुसार, छात्रों को 30 से 35 घंटे तक थाने में बंद रखा गया। इसके बाद देर रात जजेज आवास में पेशी के बाद सभी गिरफ्तार छात्रों को बेऊर जेल भेज दिया गया।
कई अभिभावकों ने अपनी आपबीती सुनाई। एक पिता ने बताया कि उनका बेटा लैपटॉप खरीदने एसपी वर्मा रोड गया था, जिसे पुलिस ने उठा लिया। एक अन्य परिजन ने कहा कि उनका भाई गांधी मैदान के पास सब्जी खरीदने गया था, और उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उसका फोन भी जब्त कर लिया, जिससे परिवार को कोई सूचना नहीं मिल पाई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने गेट के बाहर उनके साथ धक्का-मुक्की की।
क्या है पूरा मामला और पुलिस का पक्ष?
दरअसल, पिछले दिनों 22 और 25 जुलाई को पटना में छात्रों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था। 25 जुलाई को स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि छात्रों पर पुलिस पर पथराव करने का आरोप लगा। इसके बाद पुलिस एक्शन मोड में आ गई और सीसीटीवी फुटेज, वीडियो तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर छात्रों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाने लगा। रविवार की आधी रात को 258 छात्रों को बेऊर जेल भेजा गया।
इस मामले में कुल 24 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें 285 नामजद और करीब 6 हजार अज्ञात आरोपित शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, नाबालिग छात्रों को गांधी मैदान में रखा गया, जबकि बालिग छात्रों को जजेज आवास में पेशी के बाद बेऊर जेल भेजा गया। छात्रों के खिलाफ बीएनएस की धारा 109 (हत्या का प्रयास) और धारा 121 (लोक सेवक को कर्तव्य पालन से रोकने या डराने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। 22 जुलाई के प्रदर्शन के बाद भी 117 संदिग्धों के फोटो जारी किए गए थे।
आगे क्या होगा?
छात्रों की गिरफ्तारी और परिजनों के आरोपों के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। परिवारों की मांग है कि उनके बच्चों को जल्द से जल्द रिहा किया जाए और पुलिस की कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है, जो इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ करेगा।








