Darbhanga- Foreign Policy: भारत की विदेश नीति और वैश्विक परिदृश्य पर गहन मंथन दरभंगा में हुआ। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के राजनीति विज्ञान विभाग ने ‘भारत की विदेश नीति और समकालीन परिदृश्य’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में देश की वैश्विक भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई।
यूरोपियन स्टडीज, जेएनयू दिल्ली के प्रोफेसर सत्यनारायण प्रसाद ने बतौर विशेष अतिथि शिरकत की। उन्होंने वर्तमान समय में भारत की विदेश नीति और विश्व के सामने खड़ी समस्याओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रोफेसर प्रसाद ने बताया कि किसी भी देश की महानता उसकी जनता की महान सोच से तय होती है। उन्होंने कहा कि 1947 में आजादी के समय उत्पन्न आंतरिक और बाह्य समस्याओं के समाधान के लिए ही भारत की विदेश नीति का शुरुआती स्वरूप तैयार हुआ था।






प्रोफेसर सत्यनारायण प्रसाद ने कहा, “देश के सामने दो गुट, पश्चिमी और साम्यवादी, में शामिल होने का दबाव था, लेकिन हमारे राजनेता स्वतंत्र विदेश नीति के पक्षधर रहे। बिना किसी समूह में शामिल हुए, भारत ने तीसरा ग्रुप बनाया जो हाशिए पर रह रहे देशों की बुलंद आवाज बना। यह समूह सहयोग और सह-अस्तित्व की अवधारणा के साथ तीसरी दुनिया की सशक्त आवाज बनकर उभरा। देश निर्माण में समाज की भूमिका और व्यक्ति निर्माण का आधार हमारे सामने रहा, जिसका आध्यात्मिक आधार भी था।”
बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की चुनौतियां
प्रोफेसर प्रसाद ने आगे कहा कि हाल के दिनों में बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के सामने चुनौतियों का अंबार लगा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सफल कूटनीतिक और दीर्घकालिक योजना बेहद आवश्यक है, वरना यह सपना अधूरा रह सकता है। उन्होंने भारत की बढ़ती वैश्विक जिम्मेदारियों पर जोर दिया।
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के साथ वैश्विक शक्ति बनता भारत
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने भारत की विदेश नीति के सिद्धांतों पर बात की। उन्होंने बताया कि यह नीति शांति, सामरिक स्वायत्तता, बहुपक्षवाद, पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा पर आधारित है। डॉ. चौधरी ने रेखांकित किया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के साथ अपनी भूमिका का निरंतर विस्तार कर रहा है।
डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने कहा, “भारत वैश्विक शांति, सतत विकास, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करते हुए एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका का निरंतर विस्तार कर रहा है।”
इस महत्वपूर्ण व्याख्यान में पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मुनेश्वर यादव, सहायक प्रोफेसर सह उप परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनोज कुमार, सहायक प्रोफेसर डॉ. उमाकांत पासवान, सहायक प्रोफेसर रघुवीर कुमार रंजन और सहायक प्राध्यापिका डॉ. नीतू कुमारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वरीय शोधार्थी डॉ. राम कृपाल अमर, सिद्धार्थ राज, सागर सिंह, रोहन कुमार, अमिनेश कुमार, रिकी गणेश कुमार, शालिनी और प्रभु शोधार्थी के साथ-साथ दर्जनों छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की। इस आयोजन ने छात्रों और शोधार्थियों को भारत की जटिल विदेश नीति को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।








