Bihar Vidhan Parishad: बिहार विधान परिषद में नियुक्तियों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसने 100 से अधिक कर्मचारियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। शुक्रवार को जब ये नवनियुक्त कर्मचारी योगदान देने परिषद कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें परिसर के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। इस घटना के बाद सभी कर्मचारी विरोध जताने के लिए पार्क में बैठ गए, जिससे बिहार विधान परिषद परिसर में गहमागहमी का माहौल बन गया। नियुक्तियों में कथित गड़बड़ी की आशंका के चलते यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।

गेट पर ही रोके गए नए कर्मचारी, आखिर क्यों?
शुक्रवार को 100 से अधिक नवनियुक्त कर्मचारी बिहार विधान परिषद कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन मुख्य गेट पर ही सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। सुरक्षाकर्मियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें अधिकारियों के निर्देश हैं कि इन कर्मचारियों को प्रवेश न दिया जाए। प्रवेश न मिलने पर सभी कर्मचारी परिषद परिसर में बने पार्क में बैठ गए और अपनी जल्द जॉइनिंग की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इस स्थिति को देखते हुए विधान परिषद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। बताया गया कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति निजी सहायक, स्टेनोग्राफर, डाटा एंट्री ऑपरेटर और सुरक्षा प्रहरी जैसे विभिन्न पदों पर हुई है।
सात कर्मचारियों की परीक्षा से कैसे खुला नियुक्तियों का राज?
इन नियुक्तियों पर सवाल तब उठे जब सात निजी सहायकों को शॉर्टहैंड की परीक्षा के लिए बुलाया गया। इन पदों के लिए शॉर्टहैंड का ज्ञान अनिवार्य था, लेकिन चयनित उम्मीदवारों की इस योग्यता पर संदेह गहरा गया। संदेह दूर करने के लिए उनकी दक्षता जांचने के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इस परीक्षा के लिए मजिस्ट्रेट की मौजूदगी और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में पुख्ता इंतजाम किए गए थे। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह रही कि सात में से एक भी कर्मचारी परीक्षा देने नहीं पहुंचा, जिसके बाद नियुक्तियों में अनियमितता की आशंका और पुख्ता हो गई।
अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल की नियुक्तियों पर सवाल
बिहार विधान परिषद में इन सभी कर्मचारियों की बहाली पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल के दौरान हुई थी। अवधेश नारायण सिंह ने सितंबर 2026 के अंत में अचानक सभापति पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद से जेडीयू नेता डॉ. रामबचन राय उपसभापति के तौर पर परिषद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। फिलहाल, नियुक्तियों से जुड़े इस विवाद के कारण 100 से अधिक कर्मचारियों की जॉइनिंग रुकी हुई है। कर्मचारी जल्द से जल्द योगदान कराने की मांग पर अड़े हैं, जबकि परिषद प्रशासन नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की जांच पर नजर बनाए हुए है।








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