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बिहार की किस्मत बदलेगा CIMP का ये महामंथन? ‘पॉलीक्राइसिस’ में सुशासन का रास्ता!

Bihar Public Policy: पटना के चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में चौथे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई है। इसमें नीति निर्माता, शिक्षाविद और विशेषज्ञ बहुआयामी संकटों के दौर में सुशासन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर विचार-विमर्श कर रहे हैं, जिसका सीधा प्रभाव बिहार की शासन व्यवस्था पर पड़ेगा।

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Bihar Public Policy: पटना के चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (CIMP) में चौथे अंतर्राष्ट्रीय लोक नीति एवं प्रबंधन सम्मेलन (ICPPM–2026) का भव्य शुभारंभ हुआ है। दो दिवसीय यह महत्वपूर्ण आयोजन नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, सिविल सेवकों और छात्रों को समकालीन शासन चुनौतियों और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर गहन विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान कर रहा है। यह सम्मेलन जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी, यूएसए के सहयोग से और नीति आयोग के समर्थन से आयोजित किया जा रहा है, जिसका सीधा संबंध बिहार की लोकनीतियों के भविष्य से है।

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सम्मेलन का उद्घाटन और मुख्य बिंदु

इस सम्मेलन का उद्घाटन बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव एन. विजयलक्ष्मी ने किया। उद्घाटन सत्र में जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के चार्ल्स हैंकला, लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (LBSIM), नई दिल्ली के निदेशक प्रवीण गुप्ता और असम के बीरंगना सती साधनी राज्यिक विश्वविद्यालय के कुलपति जी. सिंघैया जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। CIMP के निदेशक राणा सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी के समन्वयक और सम्मेलन के संयोजक देबब्रत सामंता ने कार्यक्रम का विस्तृत परिचय देते हुए बताया कि देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से कुल 42 शोध पत्रों का चयन किया गया है।

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बिहार में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर जोर

एन. विजयलक्ष्मी ने सभा को संबोधित करते हुए एक अस्थिर और अनिश्चित वैश्विक वातावरण में अनुकूल, साक्ष्य-आधारित और न्यायसंगत नीति निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नीतियों के निरंतर मूल्यांकन और शासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग के महत्व को भी रेखांकित किया। चार्ल्स हैंकला ने ‘पॉलीक्राइसिस’ की अवधारणा को स्पष्ट किया, इसे परस्पर जुड़े वैश्विक संकटों के रूप में वर्णित किया, जिनके समाधान के लिए सहयोगात्मक, उत्तरदायी और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की आवश्यकता है। सिंघैया ने बिहार के विकास पथ पर प्रकाश डाला और शासन परिणामों को बेहतर बनाने के लिए जमीनी स्तर के संस्थानों को मजबूत करने पर जोर दिया। प्रवीण गुप्ता ने छात्रों को सार्वजनिक प्रशासन और नीति निर्माण में भविष्य की भूमिकाओं के लिए तैयार करने हेतु नेतृत्व, संचार और विश्लेषणात्मक कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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शोध प्रस्तुतिकरण और आगामी सत्र

उद्घाटन सत्र के बाद, सम्मेलन में तीन समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 25 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों में बहुआयामी और परस्पर जुड़े संकटों के संदर्भ में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव विकास जैसे विषयों को शामिल किया गया।

अपर मुख्य सचिव एन. विजयलक्ष्मी ने कहा, “बदलते वैश्विक परिदृश्य में अनुकूल, साक्ष्य-आधारित और न्यायसंगत नीति निर्माण समय की मांग है। नीतियों का सतत मूल्यांकन और AI का जिम्मेदार उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

यह सम्मेलन 3 जुलाई को भी जारी रहेगा, जिसमें विकेंद्रीकरण, स्थानीय शासन और राज्य क्षमता, जलवायु परिवर्तन, स्थिरता और नीतिगत लचीलेपन तथा ‘विकसित बिहार’ जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित होंगे। बिहार राज्य जैव विविधता बोर्ड के सहयोग से एक विशेष सत्र में पर्यावरण नीति, शासन और जैव विविधता संरक्षण पर चर्चा की जाएगी, जिसमें संस्थानों, समाज और स्थानीय समुदायों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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यह सम्मेलन नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक साथ लाकर, बिहार और देश के लिए बेहतर शासन और अधिक प्रभावी नीतियों की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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