Darbhanga News: गुरुवार, 2 जुलाई को दरभंगा के शिशो स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित भव्य ‘निरंकारी संत समागम’ में मानवता और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। मिथिलांचल के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस प्रेरणादायी आयोजन में शामिल हुए। उन्होंने प्रेम, सेवा और भाईचारे के आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। यह समागम सिर्फ एक धार्मिक सभा नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा।
आध्यात्मिक ज्ञान से ही सफल होता है मानव जीवन: ललित कुमार डालबी
समागम की अध्यक्षता कर रहे संत निरंकारी मिशन के ज्ञान प्रचारक एवं केंद्रीय उप-मुख्य संचालक ललित कुमार डालबी ने अपने उद्बोधन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मानव जीवन केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य परमात्मा के सच्चे ज्ञान को प्राप्त करना है। जब व्यक्ति इस आध्यात्मिक ज्ञान को अपने जीवन में उतारता है, तभी उसके भीतर प्रेम, विनम्रता, सेवा और मानवता के सच्चे संस्कार पनपते हैं। डालबी जी ने ‘सेवा, सत्संग और सुमिरन’ को एक आदर्श जीवन जीने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी मार्ग बताया।






‘मानवता के संदेश सुनाबय, प्रेम बनय पहचान’
कार्यक्रम के दौरान भक्ति संगीत ने समागम में मौजूद श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालु सपना जी ने अपनी मधुर वाणी में भजन प्रस्तुत करते हुए एक गहरा संदेश दिया। उनके भजन के बोल थे:
‘वेदी गबय छी, कुरान गबय छी, गबय छी भजन के तान। मानवता के संदेश सुनाबय, प्रेम बनय पहचान।’
इस प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को यह समझाया कि सभी धर्मों का मूल लक्ष्य मानवता और प्रेम का प्रसार करना है, न कि समाज को बांटना। उनके इस संदेश ने आपसी सद्भाव और भाईचारे की भावना को और मजबूत किया। कार्यक्रम का संचालन नंद किशोर राय ने कुशलतापूर्वक किया।
सेवा सबसे बड़ा धर्म, मिथिला की आध्यात्मिक विरासत
इस अवसर पर राजकुमार प्रसाद, भूपेंद्र यादव और मोहम्मद अंजर ने अपने विचार साझा करते हुए ‘सेवा को सबसे बड़ा धर्म’ बताया। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा से आत्मिक आनंद मिलता है। साथ ही, गुरु के दर्शन और सत्संग मनुष्य के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे शक्तिशाली माध्यम हैं। बरौनी ज़ोनल इंचार्ज जवाहर प्रसाद ने केंद्रीय पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए मिथिला की गौरवशाली सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि मिथिला सदियों से ज्ञान और गुरु परंपरा की भूमि रही है, जहाँ गुरु के प्रति श्रद्धा और आध्यात्मिक चिंतन की परंपरा आज भी समाज को सही दिशा दिखा रही है।समागम में बेनीपुर, जलवाड़ा, त्रिवेणीगंज, सुपौल, बेनीपट्टी और दरभंगा शहर सहित मिथिलांचल के कई अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे आयोजन सफल रहा। कार्यक्रम के समापन पर सभी भक्तों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई, जहाँ सभी ने एक साथ बैठकर समानता और भाईचारे की भावना से प्रसाद ग्रहण किया। मुरारी राय, किशुन, अरविंद सिंह, योगेंद्र महतो, मनहर और मनोज सहित सैकड़ों सेवादारों ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।








