दरभंगा का सिस्टम फिलियोर | ये क्या है… शर्म? स्कूल परिसर बना 1 महीने से तालाब, 700 बच्चे – पढ़ाई पानी में – पड़ रहे बीमार |हाकिम से शिकायत फिर भी समाधान नहीं-कौन जिम्मेदार? | पढ़िए हे छठी मैया
Darbhanga Waterlogging: बहेड़ी प्रखंड के मध्य मकतब रजखा विद्यालय में एक महीने से जलजमाव से पढ़ाई ठप है. अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे, अब छठ पूजा पर भी सुरक्षा की चिंता सता रही है.
दरभंगा का सिस्टम फिलियोर | ये क्या है… शर्म? स्कूल परिसर बना 1 महीने से तालाब, 700 बच्चे – पढ़ाई पानी में – पड़ रहे बीमार |हाकिम से शिकायत फिर भी समाधान नहीं-कौन जिम्मेदार? | पढ़िए हे छठी मैया
Darbhanga Waterlogging: बिहार के दरभंगा जिले में बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। बहेड़ी प्रखंड की जोरजा पंचायत स्थित मध्य मकतब रजखा विद्यालय परिसर में पिछले करीब एक महीने से जलजमाव की गंभीर स्थिति बनी हुई है। इस तालाब बन चुके स्कूल परिसर के कारण कक्षा एक से आठ तक के लगभग 700 बच्चों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
विद्यालय में वर्ग एक से आठ तक की पढ़ाई होती है, जहां 700 बच्चे नामांकित हैं। इन बच्चों के लिए 18 शिक्षक और मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए तीन रसोइया कार्यरत हैं। लंबे समय से बनी इस जलजमाव की स्थिति के कारण शैक्षणिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भी कमी आई है। परिसर में पानी जमा होने के कारण छोटे बच्चों के फिसलकर गिरने या किसी अप्रिय घटना का शिकार होने की आशंका लगातार बनी हुई है।
विद्यालय में जमा गंदे पानी से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। 18 शिक्षक और तीन रसोइया होने के बावजूद, परिसर में पानी भरने से
बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और मध्याह्न भोजन तैयार करने में भारी मुश्किलें आ रही हैं। इस स्थिति ने बच्चों के साथ-साथ स्कूल कर्मचारियों की भी परेशानी बढ़ा दी है।
दरभंगा के इस स्कूल में बच्चे बीमार, पढ़ाई ठप! 700 छात्रों का भविष्य दांव पर, अधिकारी मौन
Bihar School Waterlogging: बिहार के दरभंगा जिले में बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। बहेड़ी प्रखंड की जोरजा पंचायत स्थित मध्य मकतब रजखा विद्यालय परिसर में पिछले करीब एक महीने से गंभीर जलजमाव बना हुआ है। इस कारण स्कूल में नामांकित लगभग 700 बच्चों की
पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। परिसर में हर तरफ पानी भरा होने से गंदगी और संभावित बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों ने जलजमाव की इस समस्या को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मणिशंकर कुमार सिंह से शिकायत की थी, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। स्थानीय लोगों के अनुसार, विद्यालय परिसर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी जलजमाव की स्थिति बनी हुई है, जिससे न केवल स्कूल का संचालन प्रभावित हो रहा है, बल्कि स्थानीय निवासियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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जलजमाव से बच्चों की सेहत और पेयजल पर संकट
लंबे समय से विद्यालय परिसर में पानी भरा रहने से शैक्षणिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं। छोटे बच्चों को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी उपस्थिति भी लगातार घट रही है। फिसलकर गिरने या किसी अन्य दुर्घटना का शिकार होने की आशंका हमेशा बनी रहती है।
अंचलाधिकारी (सीओ) रविकांत और सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने समस्या के समाधान के लिए आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया है।
जलजमाव के बीच बच्चों और 18 शिक्षकों को शुद्ध पेयजल भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वहीं, 3 रसोइयों को मध्याह्न भोजन तैयार करने में भी दिक्कतें आ रही हैं। परिसर में जमा पानी और गंदगी से मच्छरों का प्रजनन बढ़ रहा है, जिससे दूषित वातावरण में बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि समस्या की जानकारी संबंधित पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दिए जाने के बाद भी विद्यालय की स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं की गई, तो छोटे-छोटे बच्चों के साथ कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है।
अधिकारियों को शिकायत, फिर भी समाधान नहीं: कौन जिम्मेदार?
इस गंभीर समस्या को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मणिशंकर कुमार सिंह से शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। स्थानीय लोगों के अनुसार, न सिर्फ विद्यालय परिसर बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी जलजमाव की स्थिति बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय
मुखिया आशा देवी, पंचायत समिति सदस्य प्रमिला देवी सहित कई जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया है। इसके अलावा, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), अंचलाधिकारी (सीओ) रविकांत, सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और जिला पदाधिकारी को भी दूरभाष के माध्यम से सूचना दी गई है। सीओ रविकांत और सदर एसडीओ ने आवश्यक पहल का आश्वासन दिया है, लेकिन बीडीओ और जिला पदाधिकारी से संपर्क नहीं हो पाया।
विद्यालय परिसर से सटा एक पोखर है, जहां हर साल चक्का, रजखा, मखनाहा, लालपुर और पहाड़पुर सहित आसपास के गांवों के श्रद्धालु महापर्व छठ पूजा करते हैं। ऐसे में विद्यालय परिसर और आसपास का जलजमाव स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त चिंता का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के साथ-साथ छठ पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की
सहूलियत के लिए भी जलनिकासी की समुचित व्यवस्था बेहद जरूरी है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों से जल्द से जल्द विद्यालय परिसर का निरीक्षण करने, जमा पानी की निकासी सुनिश्चित करने, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तथा परिसर को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन बच्चों के भविष्य से जुड़ी इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देता है।
इस गंभीर समस्या को लेकर विद्यालय प्रबंधन ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) मणिशंकर कुमार सिंह से शिकायत की थी, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। स्थानीय लोगों ने मुखिया आशा देवी और पंचायत समिति सदस्य प्रमिला देवी समेत अन्य जनप्रतिनिधियों को भी इस बारे में जानकारी दी।यह मामला बीडीओ, सीओ, सदर एसडीओ और जिला पदाधिकारी (डीएम) तक भी पहुंच चुका है। सीओ रविकांत और सदर एसडीओ ने आवश्यक पहल करने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। स्थानीय लोग जल्द से जल्द जल निकासी, स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
छठ पूजा पर गहराया सुरक्षा का संकट
विद्यालय परिसर से सटा एक पोखर है, जहां हर साल छठ पूजा का आयोजन होता है। चक्का, रजखा, मखनाहा, लालपुर और पहाड़पुर जैसे कई गांवों से श्रद्धालु यहां छठ महापर्व मनाने आते हैं। ऐसे में विद्यालय में जलजमाव की समस्या ने बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ छठ व्रतियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
‘प्रशासन से हमारी मांग है कि छठ पूजा से पहले जल निकासी और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और श्रद्धालुओं को भी किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।’
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि छठ पूजा से पहले इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द उचित कदम उठाना बेहद जरूरी है, ताकि एक बड़े त्योहार के दौरान भी कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
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