Madhepura Land Dispute: मधेपुरा जिले में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जमीन के म्यूटेशन और राजस्व रिकॉर्ड को अपडेट करने में कथित अनियमितताओं को लेकर सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इसमें एक पूर्व डिप्टी कलेक्टर भूमि सुधार (DCLR) और दो अंचल अधिकारी (CO) भी शामिल हैं। यह मामला चौसा अंचल के फुलौत मौजा में 37 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। कोर्ट के आदेश पर फुलौत थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
क्या है मधेपुरा का यह जमीन विवाद?
यह पूरा विवाद चौसा अंचल के फुलौत मौजा स्थित 37 डिसमिल जमीन के म्यूटेशन से संबंधित है। शिकायतकर्ता, फुलौत पूर्व निवासी बासुदेव साह का आरोप है कि यह जमीन उनके पिता बाबूलाल साह और अन्य सह-मालिकों के नाम पर दर्ज है, और उनके परिवार ने इसे कभी बेचा नहीं था। शिकायत के अनुसार, अजीत पासवान नामक व्यक्ति ने इस जमीन पर अपना दावा किया और इसे अपने नाम पर पंजीकृत करा लिया, जिसके बाद म्यूटेशन प्रक्रिया शुरू की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मूल दस्तावेजों की उचित जांच किए बिना ही म्यूटेशन को मंजूरी दे दी गई थी। उन्होंने अंचल कार्यालय में अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई थीं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज, कौन-कौन नामजद?
इस मामले में नामजद किए गए लोगों में पूर्व उदा-किशनगंज डीसीएलआर आमिर अहमद, पूर्व चौसा सीओ आशुतोष कुमार और वर्तमान में बिहटा में सीओ के पद पर तैनात राकेश कुमार सिंह शामिल हैं। इनके अलावा, पूर्व हल्का कर्मचारी सह राजस्व अधिकारी दयानंद पंडित, अजीत पासवान, रणवीर कुमार उर्फ मंटू यादव और गुरेश मेहता को भी आरोपी बनाया गया है। आशुतोष कुमार और दयानंद पंडित अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पूर्व डीसीएलआर आमिर अहमद पर पद के दुरुपयोग और अपने आधिकारिक कर्तव्यों का ठीक से निर्वहन न करने के आरोप लगे हैं।
शिकायतकर्ता बासुदेव साह के वकील ने बताया, “हमने पहले उदा-किशनगंज अनुमंडल सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट के आदेश के बावजूद FIR दर्ज होने में देरी हुई, जिसके बाद हमने पटना उच्च न्यायालय और मधेपुरा के जिला मजिस्ट्रेट व पुलिस अधीक्षक से भी संपर्क किया।”
कोर्ट के आदेश के बावजूद क्यों हुई FIR दर्ज करने में देरी?
शिकायतकर्ता बासुदेव साह के अनुसार, उन्होंने इस भूमि विवाद को लेकर 7 अगस्त, 2025 को उदा-किशनगंज अनुमंडल सिविल कोर्ट का रुख किया था। कथित तौर पर, कोर्ट ने 23 अगस्त, 2025 को फुलौत पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। हालांकि, एफआईआर लगभग एक साल बाद 12 अगस्त, 2026 को ही दर्ज की गई। शिकायतकर्ता के वकील ने बताया कि एफआईआर दर्ज न होने के बाद पटना उच्च न्यायालय के साथ-साथ मधेपुरा के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को भी आवेदन दिए गए थे। सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत भी जानकारी मांगी गई थी।
अब आगे क्या होगा, पुलिस की जांच कहां तक पहुंची?
फुलौत थानाध्यक्ष वरुण कुमार शर्मा ने पुष्टि की कि कोर्ट के आदेश पर सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच चल रही है। पुलिस संबंधित भूमि दस्तावेजों, म्यूटेशन रिकॉर्ड और विवादित लेनदेन से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में, पूर्व डीसीएलआर आमिर अहमद ने कहा कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और अधिक जानकारी वर्तमान डीसीएलआर से प्राप्त की जा सकती है।







