NEET Paper Leak: NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी ने इस इस्तीफे को सच्चाई, संघर्ष और न्याय की जीत करार दिया है। उनका मानना है कि देश भर में लगातार बढ़ते दबाव और युवा शक्ति के आगे सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा है।
सरकार के ‘अहंकार’ की हार: तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में केंद्र सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे को ‘दमनकारी सरकार के झूठ, पैंतरे और अहंकार की करारी हार’ बताया। आरजेडी नेता ने देश के युवाओं और छात्रों को उनकी इस अप्रत्याशित जीत पर बधाई दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी NEET पेपर लीक से जुड़े कई गंभीर सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं। तेजस्वी का कहना है कि देश के जागरूक युवा आगे भी सरकार की जवाबदेही तय करते रहेंगे। यह बयान साफ इशारा करता है कि विपक्ष इस मुद्दे को यहीं खत्म करने के मूड में बिल्कुल नहीं है।






“दमनकारी सरकार के झूठ, पैंतरे और अहंकार की करारी हार। सच्चाई, संघर्ष और न्याय की जीत! देश के युवाओं और छात्रों को बधाई। अभी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी है। देश का जागरूक युवा सरकार की जवाबदेही तय करता रहेगा।”
— तेजस्वी यादव, आरजेडी नेता
सिर्फ इस्तीफे से नहीं चलेगा काम: इसराइल मंसूरी
आरजेडी के अन्य बड़े नेता भी इस मुद्दे पर पूरी तरह आक्रामक नजर आ रहे हैं। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ आरजेडी नेता इसराइल मंसूरी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह फैसला बहुत पहले ही लिया जाना चाहिए था। मंसूरी के मुताबिक, सरकार ने तब कार्रवाई की जब पूरे देश में छात्रों का जबरदस्त आंदोलन भड़क उठा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ एक इस्तीफे से अब काम चलने वाला नहीं है।
इसराइल मंसूरी ने आगे कहा कि अगर सरकार समय रहते प्रधान को दोषी मानकर हटा देती, तो शायद देश में इतना बड़ा बवाल खड़ा ही नहीं होता। विपक्ष की मांगें अब और भी ज्यादा तेज हो गई हैं। मंसूरी ने मांग की है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन बेगुनाह छात्रों पर ‘नाजायज’ तरीके से मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाए और जिन छात्रों को जेल भेजा गया है, उनकी रिहाई सुनिश्चित की जाए। आरजेडी नेताओं का मानना है कि जब सरकार को कोई और रास्ता नहीं दिखा, तब जाकर मजबूरी में यह इस्तीफा मंजूर किया गया है। उनका दावा है कि सत्ता के शिखर पर बैठे लोगों का अहंकार अब टूट रहा है और जनता उनकी असलियत समझ चुकी है। आने वाले दिनों में यह सियासी संग्राम और भी ज्यादा तीखा होने की पूरी संभावना है।








