Bihar Panchayat Secretary: बिहार के पंचायती राज विभाग में पंचायत सचिवों के हालिया तबादलों की सूची ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आरोप है कि इस सूची में ऐसे नाम भी शामिल कर दिए गए हैं, जो प्रदेश में कहीं भी पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत ही नहीं हैं। बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ ने इस मामले पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे ‘पिछले दरवाजे से नियुक्ति’ का प्रयास बताया है।
बिहार पंचायत सचिव तबादला सूची पर उठे सवाल: ‘फर्जी’ नामों का खुलासा
विभाग को कुल 2248 पंचायत सचिवों का तबादला करना है, जिसमें से अब तक 1645 सचिवों का स्थानांतरण किया जा चुका है। शेष लगभग 600 कर्मचारियों का तबादला अभी लंबित है। इसी प्रक्रिया के दौरान सामने आए तीन नामों ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। संघ का दावा है कि इन तीनों नामों के कोई भी पंचायत सचिव पूरे बिहार में मौजूद नहीं हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब कर्मचारी ही नहीं हैं, तो उनका तबादला किस पद से और किस पद पर किया गया? संघ इसे नई नियुक्तियों को चोरी-छिपे अंजाम देने की कोशिश मान रहा है।
संघ की कड़ी चेतावनी और जांच की मांग
बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने इस गंभीर अनियमितता पर चिंता व्यक्त करते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि इन तीनों संदिग्ध व्यक्तियों का ‘टीआई परेड’ (पहचान परेड) कराया जाए। संघ ने विभाग से यह भी बताने को कहा है कि ये लोग पहले कहाँ तैनात थे और इनकी नियुक्ति कब हुई थी।
संघ अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि 2 सितंबर तक इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की जाती है, तो वे पटना हाईकोर्ट में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराएंगे।
फिलहाल, प्रशासनिक महकमे में इन सवालों का जवाब तलाशा जा रहा है। पंचायती राज विभाग की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संघ की इस कड़ी चेतावनी के बाद यह मामला और भी गरमा सकता है, और सभी की निगाहें विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।







