
Patna High Court Vacation Benches: पटना हाईकोर्ट ने अपनी वार्षिक छुट्टियों की घोषणा कर दी है, साथ ही अवकाशकालीन पीठों के गठन की विस्तृत जानकारी भी जारी की है। अगर आपका कोई जरूरी मामला है तो यह खबर आपके काम की है, क्योंकि कोर्ट में काम अब छुट्टियों के दौरान कैसे चलेगा, इसकी पूरी रूपरेखा तय कर दी गई है।
पटना हाईकोर्ट में 18 मई 2026 से 11 जून 2026 तक वार्षिक अवकाश रहेगा। इस दौरान, न्यायालय का कामकाज सुबह 8:30 बजे से 10:30 बजे तक और फिर 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक चलेगा। दोनों सत्रों के बीच आधे घंटे (10:30 बजे से 11:00 बजे तक) का अवकाश रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इन Patna High Court Vacation Benches के गठन से यह सुनिश्चित होगा कि आवश्यक मामलों की सुनवाई होती रहे।
छुट्टियों का समय और कामकाज के घंटे
पटना हाईकोर्ट का वार्षिक अवकाश 18 मई 2026 से शुरू होकर 11 जून 2026 तक चलेगा। इस अवधि में, न्यायालय में कामकाज के लिए विशेष समय निर्धारित किया गया है:
- सुबह का सत्र: 8:30 बजे से 10:30 बजे तक
- आधे घंटे का अवकाश: 10:30 बजे से 11:00 बजे तक
- दोपहर का सत्र: 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक
अवकाश के दौरान, किसी भी अत्यावश्यक दीवानी और आपराधिक मामलों (डबल बेंच मामलों सहित) का उल्लेख वरिष्ठतम पीठासीन न्यायाधीश के समक्ष किया जाएगा, ताकि उन्हें नियत कार्यसूची के अनुसार निपटाया जा सके। विशेष रूप से रिट याचिकाओं की सुनवाई के लिए अनुरोध किए जाने पर अतिरिक्त आवंटन किए जा सकते हैं। इस दौरान पटना हाईकोर्ट में कार्यक्षमता बनी रहेगी।
अवकाशकालीन पीठों का रोस्टर
न्यायालय ने अवकाश के दौरान सुनवाई के लिए अलग-अलग पीठों का गठन किया है। इन Patna High Court Vacation Benches में विभिन्न न्यायाधीशों को अलग-अलग सप्ताहों के लिए मामलों का निपटारा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है:
प्रथम सप्ताह: 18 मई 2026 (सोमवार) से 21 मई 2026 (गुरुवार)
- जस्टिस राजीव रॉय: दीवानी व आपराधिक आवेदन मोशन पीठ और अन्य सभी अति-आवश्यक दीवानी व आपराधिक मामले, आपराधिक मामले (धारा 482 BNSS) आपराधिक अपील (S.J.) अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (A.Bail) और किशोर न्याय अधिनियम के तहत जमानत मामले।
- जस्टिस आलोक कुमार पांडे: आपराधिक मामले (धारा 482 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (A.Bail)।
- जस्टिस रमेश चंद मालवीय: आपराधिक मामले (धारा 483 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (R.Bail)।
- जस्टिस अशोक कुमार पांडे: आपराधिक मामले (धारा 483 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (R.Bail)।
- जस्टिस सुरेंद्र पांडे: आपराधिक मामले (धारा 482 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (A.Bail)।
- जस्टिस अजीत कुमार: आपराधिक मामले (धारा 482 BNSS)।
- जस्टिस रितेश कुमार: आपराधिक मामले (धारा 482 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (A.Bail)।
- जस्टिस प्रवीण कुमार: आपराधिक मामले (धारा 482 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (A.Bail)।
- जस्टिस अंशुल: आपराधिक मामले (धारा 483 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (R.Bail)।
द्वितीय सप्ताह: 25 मई 2026 (सोमवार) से 28 मई 2026 (गुरुवार)
- जस्टिस अजीत कुमार: दीवानी व आपराधिक आवेदन मोशन पीठ और अन्य सभी अति-आवश्यक दीवानी व आपराधिक मामले, आपराधिक मामले (धारा 482 BNSS) और किशोर न्याय अधिनियम के तहत जमानत मामले।
- जस्टिस रितेश कुमार: आपराधिक मामले (धारा 482 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (A.Bail)।
- जस्टिस अंशुल: आपराधिक मामले (धारा 483 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (R.Bail)।
तृतीय सप्ताह: 01 जून 2026 (सोमवार) से 04 जून 2026 (गुरुवार)
- जस्टिस पार्थ सारथी: दीवानी व आपराधिक आवेदन मोशन पीठ और अन्य सभी अति-आवश्यक दीवानी व आपराधिक मामले, आपराधिक मामले (धारा 483 BNSS) आपराधिक अपील (S.J.) अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (R.Bail) और किशोर न्याय अधिनियम के तहत जमानत मामले।
- जस्टिस हरीश कुमार: आपराधिक मामले (धारा 482 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (A.Bail)।
- जस्टिस डॉ. अंशुमान: आपराधिक मामले (धारा 482 BNSS), आपराधिक अपील (S.J.), अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (A.Bail)।
यह सुनिश्चित किया गया है कि अवकाश के दौरान भी न्यायिक प्रक्रियाएं बाधित न हों और अत्यावश्यक मामलों को निपटाया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह व्यवस्था पटना हाईकोर्ट द्वारा जारी की गई है ताकि अवकाशकाल में भी न्याय की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहे।
महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
अदालत द्वारा जारी किए गए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अवकाशकाल में केवल उन मामलों की सुनवाई की जाएगी जिन्हें अत्यंत आवश्यक माना जाएगा। किसी भी बदलाव या अतिरिक्त आवंटन के लिए, संबंधित पक्षों को न्यायालय की आधिकारिक सूचनाओं का पालन करना होगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







