Samrat Choudhary: पटना में प्रस्तावित मां सीता महिला विश्वविद्यालय को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक अहम निर्देश जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस विश्वविद्यालय के संबंध में कोई भी अंतिम निर्णय सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श और उनके सुझावों को ध्यान में रखने के बाद ही लिया जाएगा। यह घोषणा महिला कॉलेजों के शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन के बीच आई है, जिसने अनिश्चितता के माहौल को खत्म करने का काम किया है।
बिहार के लिए CM सम्राट चौधरी का सबसे बड़ा वादा! 2030 तक नहीं जाना होगा बाहर, 33 हजार शिक्षकों की भी होगी बहाली
Bihar Employment: बिहार के युवाओं को अब रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 2030 से पहले बिहार के लोगों को राज्य में ही पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही, उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलावों की घोषणा की, जिसमें सरकारी स्कूलों का कायाकल्प और 33 हजार नए शिक्षकों की बहाली शामिल है। मुख्यमंत्री ने यह बात राज्यस्तरीय सेवा चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कही।
राज्य में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और रोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य बिहार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि अगले मार्च तक सरकारी स्कूलों में रंगाई-पोताई, पंखे और अन्य सभी जरूरी सुविधाएं दुरुस्त कर दी जाएंगी, ताकि बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल सके।
2030 तक बिहार में ही रोजगार, खत्म होगी पलायन की मजबूरी
सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि बिहार के लोगों को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी से मुक्ति दिलाना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। 2030 से पहले राज्य में ही इतने रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे कि किसी को बाहर जाने की जरूरत न पड़े। उन्होंने बताया कि पहले बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी उद्योगों के विकास में बाधा डालती थी, लेकिन अब इन सुविधाओं को बेहतर किया गया है। अगला कदम उद्योगों का बड़े पैमाने पर विस्तार करना और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा, कौशल विकास और उद्योगों को एक साथ लेकर चलने से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
शिक्षा बजट का 21% खर्च, स्कूलों में दिखेगा बड़ा बदलाव
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने बताया कि बिहार के कुल बजट का करीब 21 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि सरकार इस क्षेत्र को कितनी गंभीरता से ले रही है। इसके बावजूद, उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में और सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, ‘सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने पर काम चल रहा है। इसके तहत रंगाई-पोताई, पंखे और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा। सरकार चाहती है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल मिले।’
सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य के करीब 700 मॉडल स्कूलों में लगभग 3.5 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिन्हें बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल रही हैं। इन स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका लाभ सामान्य दिनों में करीब 1.42 लाख और सप्ताहांत में लगभग 1.75 लाख विद्यार्थी उठाते हैं। पीएम श्री विद्यालयों में भी अगले मार्च तक सभी जरूरी सुविधाएं दुरुस्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
उच्च शिक्षा का विस्तार और 33 हजार शिक्षकों की बहाली
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बिहार सरकार बड़े कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों को अपने आसपास ही उच्च शिक्षा की सुविधा मिल सके, इसके लिए प्रखंड स्तर पर डिग्री कॉलेजों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। उन्होंने एक दिन में 211 नए डिग्री कॉलेज खोलने की पहल का जिक्र किया और कहा कि कॉलेज खोलने के साथ ही योग्य शिक्षकों की उपलब्धता और पढ़ाई की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए राज्य में करीब 33 हजार नए शिक्षकों की बहाली की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि महिला शिक्षकों को यथासंभव नजदीकी पंचायतों में और अन्य शिक्षकों को नजदीकी प्रखंडों में तैनात किया जाए, ताकि व्यावहारिक कठिनाइयां दूर हों। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग सात लाख शिक्षक बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति के साथ प्रशिक्षण और गुणवत्ता पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
ऑक्सफोर्ड में प्रशिक्षण लेंगे बिहार के शिक्षक
बिहार की शैक्षणिक गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बिहार के शिक्षकों को दुनिया के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके तहत, कॉलेजों के करीब 100 शिक्षकों को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण के बाद ये शिक्षक बिहार लौटकर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। सम्राट चौधरी ने नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार को अपनी गौरवशाली शैक्षणिक विरासत को फिर से प्राप्त करना होगा।
मुख्यमंत्री ने बिहार की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एक समय राज्य का बजट करीब छह हजार करोड़ रुपये था, जो 2024 में बढ़कर लगभग 3.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस बढ़े हुए बजट के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर परिणाम देने की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। अंत में, मुख्यमंत्री ने साइकिल और पोशाक योजनाओं की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि ‘आज के बच्चे ही कल के नायक और महानायक’ बनेंगे, और विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब उन्हें अच्छी शिक्षा और अवसर मिलेंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री को मिला निर्देश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री संजय सिंह टाइगर को तत्काल प्रभाव से इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि बिहार विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस मुद्दे पर आगे बढ़ा जाए। फिलहाल, मां सीता महिला विश्वविद्यालय के गठन को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, जिससे शिक्षकों और हितधारकों को राहत मिली है।
चुनाव के बाद होगी अहम बैठक
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, बिहार विधान परिषद चुनाव खत्म होने के बाद प्रस्तावित मां सीता महिला विश्वविद्यालय से जुड़े सभी हितधारकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में उनके विचारों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा होगी। इन सुझावों के आधार पर ही विश्वविद्यालय के भविष्य से संबंधित निर्णय लिए जाएंगे।
शिक्षकों की थी मूल अधिनियम लागू करने की मांग
मां सीता महिला विश्वविद्यालय के गठन को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों में शिक्षकों ने महिला कॉलेजों को अलग-अलग व्यवस्थाओं में बांटने के बजाय एक एकीकृत शैक्षणिक व्यवस्था बनाने की मांग की थी। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि कॉलेजों के भविष्य और शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े फैसलों में संबंधित पक्षों की राय लेना बेहद जरूरी है। अरविंद महिला कॉलेज के खेल विभाग की शिक्षिका नीलम कुमारी ने जोर देकर कहा कि सरकार को नए संशोधनों के माध्यम से कॉलेजों को अलग करने के बजाय वर्ष 1976 के मूल अधिनियम को ही लागू करना चाहिए।
“सरकार को नए संशोधनों के माध्यम से कॉलेजों को अलग करने के बजाय वर्ष 1976 के मूल अधिनियम को लागू करना चाहिए।” – नीलम कुमारी, शिक्षिका, अरविंद महिला कॉलेज
कौन-कौन हुए थे प्रदर्शन में शामिल?
इस विरोध प्रदर्शन में पटना विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध कई अंगीभूत महाविद्यालयों के शिक्षक और संकाय प्रमुख शामिल हुए थे। कॉमर्स कॉलेज के संतोष कुमार, जेडी वीमेंस कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. सीमा और दर्शनशास्त्र विभाग की हीना मैम जैसे कई प्रमुख लोग प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान इनमें से कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था। इन सभी ने महिला उच्च शिक्षा से संबंधित प्रस्तावित बदलावों पर अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई थी।
आगे क्या होगा?
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब सभी की निगाहें बिहार विधान परिषद चुनाव के बाद होने वाली बैठक पर टिकी हैं। उच्च शिक्षा विभाग को सभी पक्षों के विचारों को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ने का निर्देश मिला है। यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में लिया गया कोई भी निर्णय व्यापक सहमति और हितधारकों की संतुष्टि पर आधारित हो।







