राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के हालिया जन्मदिन समारोह में एक ऐसा तोहफा दिया गया है, जिसने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने लोक गायक छोटू छलिया को कथित तौर पर हीरे जड़ित कंगन भेंट किया था। अब इस ‘बहुमूल्य’ कंगन की खरीद और स्रोत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिससे सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
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जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधान पार्षद नीरज कुमार ने इस मामले में कड़ी आपत्ति जताते हुए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से गहन जांच की मांग की है। नीरज कुमार ने बाकायदा एक पत्र लिखकर EOU से यह पता लगाने को कहा है कि यह कथित हीरे का कंगन कितने में खरीदा गया था और इसका भुगतान किस प्रकार किया गया। उन्होंने इस बहुचर्चित भेंट पर तत्काल और उचित कार्रवाई की अपील की है, ताकि इसकी सच्चाई सामने आ सके।
नीरज कुमार ने अपने सार्वजनिक बयान में इस पूरे प्रकरण को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि लालू प्रसाद के जन्मदिन के अवसर पर, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भोजपुरी गायक छोटू छलिया को एक कंगन भेंट किया। छोटू छलिया, जो काफी लंबे समय से लालू प्रसाद और उनके परिवार की सेवा में रहे हैं, उन्होंने स्वयं इस कंगन को हीरे का बताया है। नीरज कुमार ने इस पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर यह हीरे का कंगन आया कहां से, इसका वास्तविक स्रोत क्या है और इसकी खरीद संबंधी कोई रसीद है या नहीं।
जदयू नेता ने आगे पूछा कि इस कंगन की बाजार में अनुमानित कीमत क्या है। उन्होंने जोर दिया कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इन सभी सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि इस तरह की महंगी भेंट का स्रोत और उसकी वित्तीय लेन-देन की जानकारी आम जनता को होनी चाहिए।
कंगन की खरीद और स्रोत पर उठे गंभीर सवाल
नीरज कुमार ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभिन्न कानूनों के तहत जांच की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आयकर अधिनियम 1961, बेनामी लेनदेन अधिनियम 1988 और धनशोधन निवारण अधिनियम 2002 जैसे महत्वपूर्ण कानूनों का जिक्र किया। इन अधिनियमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध इकाई को इन कानूनी प्रावधानों के आलोक में पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल करनी चाहिए, क्योंकि यह वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हो सकता है।
जदयू विधान पार्षद ने लालू परिवार पर परोक्ष हमला करते हुए आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति का सृजन करना उनकी राजनीतिक नियति रही है। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि लालू परिवार का पुराना इतिहास रहा है। इसलिए, यह कंगन किसका था, किसने दिया और यह हीरे का है या नहीं, इन सभी पहलुओं का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए। नीरज कुमार ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच की मांग की है, ताकि सत्य सामने आ सके और बिहार Politics News में चल रहे इस विवाद का पटाक्षेप हो सके।
जदयू का यह भी कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्तियों को अगर कोई बहुमूल्य वस्तु उपहार में मिलती है, तो उन्हें उसका स्रोत और उसकी कीमत पारदर्शी तरीके से बतानी चाहिए। यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे उपहारों को लेकर कोई संदेह न रहे।
आर्थिक अपराध इकाई से जांच की मांग
गौरतलब है कि लालू यादव के जन्मदिन के मौके पर राबड़ी देवी द्वारा गायक छोटू छलिया को दिया गया यह कंगन शुरू से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। खुद छोटू छलिया ने इसे एक ‘बहुमूल्य’ भेंट करार दिया था, जिसके बाद से ही इस पर सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई थी। जदयू लगातार इस मामले की विस्तृत जांच की मांग कर रही है और इसे लालू परिवार की आय से अधिक संपत्ति के मामले से जोड़कर देख रही है।
जदयू का आरोप है कि इस तरह की महंगी भेंट बेनामी संपत्ति सृजन का एक जरिया हो सकती है, जिसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। वहीं, इस पूरे विवाद पर राष्ट्रीय जनता दल की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। राजद की चुप्पी से इस मामले को लेकर सियासी माहौल और गरमा गया है, और विरोधी दल इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
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इस प्रकरण ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में गहमागहमी बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ेगा और इस पर और अधिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है, जिससे राज्य की सियासत में हलचल बनी रहेगी।







