
दोहरी डिग्री कार्यक्रम: पटना विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक बड़ी खबर है! अब आप एक ही समय में दो अलग-अलग डिग्रियां हासिल कर पाएंगे, जिससे आपकी करियर संभावनाओं को पंख लगेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य छात्रों को आज के प्रतिस्पर्धी बाजार के लिए तैयार करना है।
पटना विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘दोहरी डिग्री’ व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। हाल ही में सिंडिकेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसे पहले ही शैक्षणिक परिषद की मंजूरी मिल चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, सिंडिकेट से हरी झंडी मिलने के बाद इसे 23 मई को होने वाली सीनेट की बैठक में रखा जाएगा। सीनेट की स्वीकृति के बाद, अंतिम अनुमति के लिए प्रस्ताव राजभवन भेजा जाएगा। राजभवन से स्वीकृति मिलते ही पटना विश्वविद्यालय में ‘दोहरी डिग्री कार्यक्रम’ औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा।
छात्रों को कैसे मिलेगा Dual Degree Program का लाभ?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप, छात्रों को अब एक साथ दो अलग-अलग पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने की अनुमति होगी। स्नातक स्तर के विद्यार्थी अपने मुख्य तीन या चार वर्षीय डिग्री कोर्स के साथ-साथ किसी रोजगारपरक पाठ्यक्रम में भी अध्ययन कर सकेंगे। इसी तरह, स्नातकोत्तर छात्र भी अपने नियमित दो वर्षीय पाठ्यक्रम के साथ कोई व्यावसायिक कोर्स कर पाएंगे।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन दो पाठ्यक्रमों में से एक नियमित (ऑफलाइन) माध्यम में होगा और दूसरा ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। इससे विद्यार्थियों पर पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और वे दोनों पाठ्यक्रमों को संतुलित ढंग से मैनेज कर पाएंगे। हालांकि, शोध स्तर (पीएचडी) के विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह पहल छात्रों को बहुआयामी कौशल विकसित करने में मदद करेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि पारंपरिक डिग्रियां अब पर्याप्त नहीं हैं। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में छात्रों को तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी आवश्यक हैं। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें नौकरी के बेहतर अवसर दिलाना है।
समय की बचत और बेहतर करियर अवसर
उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र नियमित माध्यम से इतिहास विषय में स्नातक कर रहा है, तो वह साथ ही ऑनलाइन माध्यम से डेटा साइंस, प्रबंधन या अन्य व्यावसायिक विषयों की पढ़ाई भी कर सकेगा। शिक्षाविदों का कहना है कि पहले दो अलग-अलग डिग्रियां प्राप्त करने में छह साल तक लग जाते थे, लेकिन नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थी मात्र तीन वर्षों में दो अलग-अलग क्षेत्रों की विशेषज्ञता हासिल कर पाएंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि छात्रों को बहुविषयक ज्ञान भी प्राप्त होगा।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय और भविष्य की राह
इसी बैठक में सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से पूर्व सैनिकों के लिए मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। यह पाठ्यक्रम पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को नए शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करने में सहायक होगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई शिक्षा नीति और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह पहल छात्रों के भविष्य को मजबूत बनाने में सहायक साबित होगी। वर्तमान में रोजगार बाजार में उन्हीं युवाओं की मांग अधिक है, जिनके पास पारंपरिक शिक्षा के साथ तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी मौजूद हों।
यह पहल छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ कौशल विकास का भी अवसर देगी, जिससे वे न केवल अकादमिक रूप से मजबूत होंगे, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार हो सकेंगे। पटना विश्वविद्यालय की यह पहल राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह व्यवस्था छात्रों की रोजगार क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि करेगी। फिलहाल छात्रों और अभिभावकों की नजर अब सीनेट और राजभवन की मंजूरी पर टिकी हुई है, जिसके बाद यह नई शिक्षा व्यवस्था धरातल पर उतर सकेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/






