Rahul Gandhi Supreme Court: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई राजनीतिक टिप्पणी से जुड़े मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम आदेश दिया।
अदालत ने इस मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जब तक मामले की अगली सुनवाई पूरी नहीं होती, तब तक निचली अदालत में आगे की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं चलेगी। इस निर्णय से राहुल गांधी को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।
मानहानि मामले की पूरी कहानी
यह पूरा विवाद वर्ष 2018-19 के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने मुंबई की मजिस्ट्रेट अदालत में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया, जिससे भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं की सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचा।
राहुल गांधी के वकीलों ने अदालत में दलील दी थी कि उनके बयान में सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल या पहचान योग्य समूह का नाम नहीं लिया गया था। इसलिए, इस बयान को मानहानि की श्रेणी में रखकर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल
राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 8 सितंबर के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में शशि थरूर से जुड़े एक पुराने मामले का हवाला दिया था। हाईकोर्ट ने राजनीतिक दल को मानहानि वाद के लिए वैध संस्था माना था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में परखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया है और उन्हें चार हफ्ते में जवाब दाखिल करना होगा। इस दौरान निचली अदालत में कोई कानूनी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी, जिससे राहुल गांधी को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अब शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि क्या राजनीतिक दल को मानहानि का दावा करने का अधिकार है, जैसा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना था।







