Bihar Assembly: दिल्ली में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं की हिरासत को लेकर बुधवार को बिहार विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। मानसून सत्र के दौरान महागठबंधन के विधायकों ने विधानसभा पोर्टिको में जोरदार प्रदर्शन करते हुए केंद्र और बिहार सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस घटना ने सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल को गरमा दिया।
लोकतंत्र पर हमले का आरोप
विपक्षी विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे नेताओं को हिरासत में लेना “लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण” है। प्रदर्शन के दौरान “लोकतंत्र बचाओ” और “तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे भी लगाए गए, जो विपक्षी दलों के आक्रोश को दर्शाते हैं।






छात्रों के मुद्दों पर आवाज दबाने का दावा
महागठबंधन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि छात्रों और युवाओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर सवाल उठाने वाली आवाजों को खामोश किया जा रहा है। उनका दावा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लेने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई असहमति को दबाने की कोशिश है, जिसे जनता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली पुलिस द्वारा मंगलवार को छात्रों के समर्थन में हुए प्रदर्शन के दौरान कई विपक्षी नेताओं की हिरासत की निंदा करने के उद्देश्य से किया गया था।

सदन में कार्यवाही से पहले हंगामा
विधानसभा परिसर में इस प्रदर्शन ने कार्यवाही शुरू होने से पहले ही एक संक्षिप्त राजनीतिक गतिरोध पैदा कर दिया। हालांकि, बाद में विधायक सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए अंदर चले गए। इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से विपक्षी दलों ने सरकार पर अपनी नीतियों के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है।
बिहार विधानसभा के इस मानसून सत्र में यह मुद्दा आगे भी गर्माया रह सकता है, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है।








