Bihar Solar Light: Bihar Assembly Live झटका! बिहार में अपनी ही सरकार के मंत्री को विधायकों ने दी खुली चुनौती, अंधेरे में डूबे गांव| पढ़िए – क्यों BJP MLA जीवेश कुमार और JDU MLA अजीत कुमार ने मंत्री दीपक प्रकाश को घेरा। पढ़िए -मंत्री के जवाब से विधायक संतुष्ट नहीं हुए। बीजेपी विधायक जीवेश कुमार ने मंत्री के आंकड़ों पर क्यों उठाया सवाल ? क्यों कहा कि अगर मंत्री के जवाब में…
मॉनसून सत्र के दौरान बिहार विधानमंडल में एक अप्रत्याशित स्थिति देखने को मिली। सत्ताधारी गठबंधन के विधायकों ने अपनी ही सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के जवाब को सदन में चुनौती दे डाली। मामला ग्रामीण क्षेत्रों में लगाई गई सोलर लाइटों के खराब होने और उनके रखरखाव से जुड़ा था, जिसने सदन में जमकर हंगामा खड़ा कर दिया।






बीजेपी विधायक जीवेश कुमार और जदयू विधायक अजीत कुमार ने पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में अधिकांश सोलर लाइटें ठीक से काम नहीं कर रही हैं। यह मुद्दा तब और गहरा गया जब विधायक श्याम रजक ने पूरक प्रश्न करते हुए कहा कि आज भी जो सोलर लाइटें लगी हैं, वे बुझी हुई हैं, जिससे पूरा इलाका अंधेरे में डूबा है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 70 फीसदी लाइटें खराब हो चुकी हैं और संवेदक पैसा लेकर भाग गया है।

मंत्री के दावों पर विधायकों का पलटवार
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने विधायकों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह ‘सीन बनाया जा रहा है’ कि 70 फीसदी लाइटें बुझी हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसा नहीं है और जहां कहीं भी दिक्कत है, उसकी मरम्मती के लिए पूरी व्यवस्था की गई है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी एजेंसी राशि लेकर नहीं भागी है।
मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा, “यह सीन बनाया जा रहा है कि 70 फीसदी लाइट बूझी हुई है। लेकिन ऐसा नहीं है। 70 फीसदी लाइट नहीं बूझी हुई है। इसमें जहां कहीं भी दिक्कत है उसकी मरम्मती के लिए पूरी व्यवस्था की गई है। कहीं कोई भी एजेंसी राशि लेकर नहीं भागी है। उसी एकरारनामा में सोलर लाइट की मरम्मती की भी व्यवस्था की गई है। उनकी 30 प्रतिशत राशि पंचायत के साथ सुरक्षित रहती है जो कि पांच सालों में उनको देना है। अगर मरम्मती में दिक्कत होती है तो उनका पेमेंट रोक लिया जाता है और अगर इसके बाद भी मरम्मती नहीं होती है तो उनपर कार्रवाई की जाती है।”
हालांकि, मंत्री के इस जवाब से विधायक संतुष्ट नहीं हुए। बीजेपी विधायक जीवेश कुमार ने मंत्री के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मंत्री के जवाब में 5 लाख सोलर लाइटों के मुकाबले 8.90 लाख का आंकड़ा दिया गया है, तो 20-25 प्रतिशत लाइटों की कमी स्पष्ट दिखती है।
जिवेश मिश्र ने मंत्री दीपक प्रकाश को चुनौती देते हुए कहा, “मैं मंत्री जी को चुनौती देता हूं कि चले मेरे साथ और देख लें कि 50 फीसदी लाइट बूझी हुई है या नहीं? मंत्री बताएं कि वो कब टीम बनाएंगे और विधायकों को उसमें शामिल कर ले चलेंगे?”
JDU विधायक ने भी खोला मोर्चा
जदयू विधायक अजीत कुमार ने भी अपनी ही सरकार के मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने बताया कि एक सोलर लाइट लगाने में 32 से 33 हजार रुपये का खर्च आता है और सरकार ने इसके माध्यम से गरीबों के मोहल्ले में रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोशिश की है।
अजीत कुमार ने मंत्री दीपक प्रकाश को सीधी चुनौती देते हुए कहा, “हम मंत्री को चुनौती देते हैं मैं, जिला के हमारे पंचायती राज पदाधिकारी, बीडीओ और प्रखंड का पंचायती राज पदाधिकारी पूरी रात कांटी क्षेत्र के तीन पंचाायतों में हमने भ्रमण किया और 70 फीसदी लाइटें नहीं जल रही थीं। उसमें भी खासकर जो गरीबों के मुहल्ले में हैं वो लाइटें नहीं जल रही थीं।”
जिवेश मिश्र ने मंत्री से यह भी पूछा कि सरकार का पैसा लगता है, अगर लाइट खराब है तो इसको देखने वाला कौन है? फोन करने पर फोन नहीं उठाया जाता। विधायकों के तीखे तेवर और जमीनी हकीकत से जुड़े आरोपों के बाद विधानसभाध्यक्ष ने मंत्री दीपक प्रकाश को इस मामले को गंभीरता से दिखवा लेने का निर्देश दिया। मंत्री ने अपने बचाव में यह भी कहा कि उनके उत्तर में साफ-साफ लिखा है कि 97 फीसदी लाइट का अधिष्ठापन हुआ है, लेकिन जहां दिक्कत है उसके लिए लिखित शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना दर्शाती है कि पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के विभाग में सोलर लाइटों की स्थिति पर विधायकों में गहरा असंतोष है, और वे इस मुद्दे पर सरकार से ठोस कार्रवाई चाहते हैं। अब देखना होगा कि मंत्री इस चुनौती का सामना कैसे करते हैं और ग्राउंड पर कब तक सुधार दिखाई देता है।








