Bihar Development Projects: हर साल बिहार में कोसी, गंडक, बागमती जैसी नदियां जब उफान पर आती हैं, तो सिर्फ पानी नहीं पहुंचता, बल्कि गांवों की उम्मीदें भी डूब जाती हैं। इसी समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली में केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी मांग लेकर पहुंचे। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर करीब 11000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की अपील की है, ताकि राज्य के महत्वपूर्ण जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को गति मिल सके।
केंद्र से 11000 करोड़ की मांग, बाढ़ से मिलेगी राहत
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ हुई बैठक में बिहार की लंबित जल परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने पर जोर दिया। इस महत्वपूर्ण बैठक में उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी उनके साथ मौजूद थे। राज्य का लगभग 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र हर साल बाढ़ की चपेट में आता है, ऐसे में केंद्र से मिली यह सहायता ‘Bihar Development Projects’ के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।
कोसी-मेची लिंक परियोजना को गति देने की अपील
बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कोसी-मेची लिंक परियोजना के पहले चरण की धीमी वित्तीय प्रगति का मुद्दा उठाया। यह परियोजना लगभग 3652.56 करोड़ रुपये की है, जिसके पहले चरण के लिए 965.41 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे। हालांकि, अब तक सिर्फ 156.745 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं। मुख्यमंत्री ने शेष राशि जल्द जारी करने के साथ ही परियोजना के दूसरे चरण के विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को भी मंजूरी देने का अनुरोध किया।
इसके अतिरिक्त, पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के लिए भी केंद्र से आर्थिक मदद मांगी गई। 8,338.89 करोड़ रुपये के डीपीआर वाली इस परियोजना का पहला चरण बिहार सरकार अपने संसाधनों से शुरू कर चुकी है।
इन बड़ी परियोजनाओं को केंद्रीय बजट में शामिल करने की मांग
बिहार सरकार ने केंद्र से इंद्रपुरी जलाशय योजना, सोन-फल्गु रिवर लिंक और सारण बाढ़ नियंत्रण और जलनिकासी परियोजना को केंद्रीय बजट 2026-27 में शामिल करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने नेपाल से जुड़ी कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय और बागमती बांध परियोजनाओं के सर्वेक्षण और डीपीआर में तेजी लाने की भी मांग की।
बांग्लादेश के साथ जल समझौते के नवीनीकरण को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कहा, ‘इसमें बिहार के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।’
उन्होंने राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाने की मांग भी रखी, जो नदियों में बढ़ती गाद की समस्या से निपटने के लिए आवश्यक है।
बाढ़ नियंत्रण के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की जरूरत
मुख्यमंत्री ने बाढ़ नियंत्रण के लिए चल रहे फ्लड मैनेजमेंट एंड बॉर्डर एरिया प्रोग्राम (FMBAP) के अंतर्गत बिहार के लिए बजटीय प्रावधान बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘बिहार देश के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्यों में से एक है। राज्य का लगभग 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आता है और गंगा, कोसी, बागमती जैसी नदियों के कारण हर वर्ष बड़ी आबादी प्रभावित होती है। ऐसे में जरूरतों के अनुरूप अधिक केन्द्रीय सहायता आवश्यक है।’
यह पहल बिहार को बाढ़ के कहर से बचाने और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इन मांगों पर कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देती है, जिससे राज्य के लाखों लोगों को राहत मिल सके।

















