Bihar Khet Bachao Abhiyan: खेती की सेहत सुधारने और किसानों को सशक्त बनाने के लिए बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन-आंदोलन का रूप देने की दिशा में अब राज्य के सभी 38 जिलों में मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इस पहल से न केवल किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि नई पीढ़ी भी मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो सकेगी।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पटना के ज्ञान भवन में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान सह कृषि जन कल्याण संवाद’ कार्यक्रम में यह बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 तक राज्य के 629 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालयों में ये प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इससे विद्यार्थी वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी की गुणवत्ता को समझ पाएंगे।
कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “मिट्टी का स्वस्थ रहना कृषि, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। खेतों की उर्वरता और मिट्टी के प्राकृतिक स्वास्थ्य का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि इसमें किसानों और आम लोगों की भागीदारी भी आवश्यक है। खेत बचेंगे, तभी जीवन बचेगा और मिट्टी बचेगी, तभी किसान समृद्ध होंगे।”
स्कूलों में मिट्टी जांच लैब: नई पीढ़ी को वैज्ञानिक समझ
बिहार सरकार का यह कदम मिट्टी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को कृषि विज्ञान से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है। पहले ही राज्य के 160 पीएम श्री उच्च विद्यालयों में ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इन मिनी लैब के माध्यम से छात्र-छात्राएं अपनी मिट्टी की जांच स्वयं कर सकेंगे और उसकी उर्वरता के बारे में जान पाएंगे। यह पहल उन्हें भविष्य में कृषि क्षेत्र में नवाचार के लिए भी प्रेरित करेगी।
गांव-गांव तक पहुंचेगा ‘खेत बचाओ अभियान’: लाखों किसानों से संवाद
देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत 22 अक्टूबर को हुई थी, जिसे बिहार में जनभागीदारी के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। यह अभियान 30 नवंबर 2026 तक संचालित होगा। कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ मौसम में राज्यभर में 7,275 किसान बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें कुल 6,19,436 किसानों ने भाग लिया। इनमें 2,12,610 महिला किसान शामिल थीं, जो कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
रबी मौसम 2026-27 में इस अभियान को राज्य के सभी 534 प्रखंडों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत 15 से 16 लाख किसानों को जागरूक करने की योजना है। इस दौरान किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना जाएगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार लाया जाएगा।
किसानों की समस्याओं का ऑन-स्पॉट समाधान
किसान जन कल्याण संवाद कार्यक्रम में कृषि मंत्री और विभागीय अधिकारियों ने किसानों से सीधा संवाद किया। इस दौरान फार्मर आईडी, डिजिटल क्रॉप सर्वे और कृषि यांत्रीकरण सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान करें और उन्हें समय पर योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराएं।
माननीय विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा, “वर्तमान समय में खेतों और मिट्टी की उर्वरता बचाना बड़ी चुनौती बन गया है। बिहार में वर्ष 2005 में एनडीए सरकार बनने के बाद वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कृषि रोड मैप लागू किया गया। इसके तहत विभिन्न विभागों को जोड़कर कृषि क्षेत्र के समग्र विकास का प्रयास किया गया, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि हुई।”
यह अभियान और मिनी मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना बिहार में कृषि को टिकाऊ बनाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। सरकार का लक्ष्य है कि मिट्टी के स्वास्थ्य को सुनिश्चित कर कृषि उत्पादन बढ़ाया जाए और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो।

















