Bihar Anant Singh: मोकामा टाल क्षेत्र के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। इस मामले में बिहार के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद दुलारचंद हत्याकांड में दर्ज तीन अलग-अलग एफआईआर (FIR) और उनमें लगे विरोधाभासी आरोप फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। घटना के बाद से ही ये तीनों प्राथमिकी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई थीं।
पुलिस की जांच रिपोर्ट में अनंत सिंह समेत कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप सही पाए गए हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर दुलारचंद यादव के परिजनों ने 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया था, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने यह अहम निर्देश दिया। आइए जानते हैं क्या थे इन तीन एफआईआर में लगाए गए आरोप और क्या है पुलिस की जांच रिपोर्ट का खुलासा।

दुलारचंद के पोते नीरज कुमार की पहली FIR: गोली और थार से कुचलने का आरोप
दुलारचंद यादव हत्याकांड में सबसे पहली प्राथमिकी उनके पोते नीरज कुमार के बयान पर भदौर थाने में दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में मोकामा विधायक अनंत सिंह, उनके भतीजे राजवीर सिंह और कर्मवीर सिंह के साथ ही छोटन सिंह और कंजम सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया था। नीरज कुमार ने अपने आवेदन में बताया था कि चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे थे।
नीरज कुमार के आवेदन के मुताबिक, अनंत सिंह और दुलारचंद यादव के बीच कहासुनी हुई। विवाद बढ़ने पर अनंत सिंह के दोनों भतीजे भी वहां पहुंचे और गोली चला दी, जो दुलारचंद यादव के पैर में लगी। इसके बाद छोटन सिंह और कंजम सिंह ने थार गाड़ी से उन्हें कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 103 और 3(5) के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें हत्या और सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़े आरोप शामिल थे।
अनंत सिंह समर्थक की दूसरी FIR: जन सुराज प्रत्याशी पर पलटवार
दुलारचंद यादव हत्याकांड में दूसरी प्राथमिकी अनंत सिंह के समर्थक जितेंद्र कुमार की ओर से दर्ज कराई गई थी। इस एफआईआर में जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी, लखन महतो, बाजो महतो, नीतीश महतो, ईश्वर महतो, अजय महतो समेत अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था।
जितेंद्र कुमार की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में इन लोगों पर हमला करने और हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 126(2), 115(2), 109(1), 324(9), 352, 351(2) और 35 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस तरह, पहली प्राथमिकी जहां अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर आरोप लगा रही थी, वहीं दूसरी एफआईआर में जन सुराज प्रत्याशी और उनके समर्थकों को घटना का जिम्मेदार ठहराया गया था।
पुलिस की तीसरी FIR और जांच रिपोर्ट: आरोपियों पर लगे आरोप सही
दुलारचंद यादव हत्याकांड में तीसरी प्राथमिकी पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दर्ज की थी। इस एफआईआर का आधार घटना से जुड़े सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और डॉक्टरों की ओर से तैयार पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को बनाया गया था। घटना के बाद कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दुलारचंद यादव की मौत से जुड़े चिकित्सकीय तथ्यों का उल्लेख था।
पटना पुलिस ने तीनों एफआईआर और उनसे जुड़े साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस की जांच में अनंत सिंह समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। रिपोर्ट में एसडीपीओ और एसपी स्तर पर की गई जांच और पर्यवेक्षण का भी विशेष उल्लेख है। जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट का सरेंडर संबंधी आदेश अब इन सभी एफआईआर और पुलिस जांच रिपोर्ट को फिर से चर्चा के केंद्र में ले आया है।

















