Bihar Politics: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भागलपुर में विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर लगातार सवाल उठा रहे विपक्ष को आड़े हाथों लिया। चिराग पासवान ने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों की राजनीतिक स्थिति और उनके चुनावी प्रदर्शन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
EVM पर सवाल उठाने वाले विपक्ष को चिराग पासवान का जवाब
चिराग पासवान ने विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव में हार मिलने पर वे तुरंत EVM को दोषी ठहराने लगते हैं। उन्होंने विपक्ष से पूछा, ‘आप लोग EVM-EVM करते थे, लेकिन इस बार विधान परिषद के चुनाव बैलेट पेपर से हुए, तब विपक्ष कहां था?’ केंद्रीय मंत्री ने नागपुर की एक सीट जीतने पर विपक्षी खेमे में खुशी मनाने पर भी तंज कसा। उन्होंने सवाल उठाया कि एक सीट जीतने पर जश्न मनाया जा रहा है, लेकिन बिहार में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की वास्तविक स्थिति क्या है?
कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास पर उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के बिहार और उत्तर प्रदेश में कमजोर प्रदर्शन को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में आखिरी बार कांग्रेस की सरकार कब बनी थी और उस समय कौन-सा EVM था। चिराग पासवान ने यह भी रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस दशकों से सत्ता से बाहर है। ऐसे में हर चुनाव में EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना कहां तक उचित है, यह सवाल उन्होंने विपक्ष से पूछा।
‘देश में अराजकता फैलाना चाहता है विपक्ष’
‘कुछ राजनीतिक दल अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए देश में अराजकता का माहौल पैदा करना चाहते हैं।’
चिराग पासवान ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए देश में अराजकता का माहौल पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान, फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि विपक्ष भारत में भी वैसी ही परिस्थितियाँ उत्पन्न करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सबसे ऊपर होता है और सभी राजनीतिक दलों को चुनाव परिणामों का सम्मान करना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को सलाह दी कि हारने पर चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय, उन्हें अपनी राजनीतिक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए।

















