Bihar River Transport: विक्रमशिला सेतु के बंद होने के बाद बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पार करने के लिए नाव और जहाज ही एकमात्र सहारा बन गए हैं। इस वैकल्पिक Bihar River Transport व्यवस्था के तहत, प्रशासन ने जहाजों के संचालन का समय सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित किया है, ताकि यात्रियों की आवाजाही सुरक्षित और नियंत्रित रह सके। हालांकि, इस व्यवस्था को बनाए रखने में कई चुनौतियां आ रही हैं, जिसका ताजा उदाहरण बियाडा घाट पर हुई घटना है।
रात में जहाज चलाने की मांग पर बियाडा घाट पर बवाल
बीती शाम, भागलपुर के बियाडा घाट पर तय समय सीमा के बाद जहाज चलाने को लेकर भारी हंगामा हो गया। आरोप है कि कुछ यात्री घाट पर खड़े दूसरे जहाज पर जबरन चढ़ गए और तय समय बीत जाने के बावजूद उसे भी चलाने की जिद करने लगे। इस दौरान जहाज के क्रू मेंबरों और हंगामा करने वाले यात्रियों के बीच तीखी बहस हुई, जिससे स्थिति बिगड़ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को मौके पर बुलाया गया, जिसने हंगामा करने वालों को हिरासत में ले लिया।
प्रशासन की सख्ती और सुरक्षा के निर्देश
विक्रमशिला सेतु बंद होने के कारण रोजाना बड़ी संख्या में लोग नदी मार्ग पर निर्भर हैं। सुबह ऑफिस, बाजार या अस्पताल जाने वाले और शाम को घर लौटने वाले यात्रियों की भीड़ घाटों पर काफी बढ़ जाती है। प्रशासन का कहना है कि संचालन के लिए समय-सीमा इसलिए तय की गई है, ताकि अंधेरे में नौका संचालन का जोखिम न बढ़े। साथ ही, यह क्रू मेंबरों की ड्यूटी को भी व्यवस्थित रखता है। बियाडा घाट की घटना के बाद, स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सभी घाटों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं।
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे तय समय के अंदर ही अपनी यात्रा पूरी करें और जहाज कर्मियों पर बहस या दबाव बनाने से बचें। सेतु बंद रहने तक यह वैकल्पिक नदी परिवहन ही मुख्य सहारा है, इसलिए सुरक्षा के लिए समय का पालन और घाट पर अनुशासन दोनों ही बेहद जरूरी हैं।
अंधेरे में गंगा नदी में जहाजों का संचालन सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक माना जाता है। ऐसे में प्रशासन द्वारा तय किए गए नियमों का पालन करना सभी यात्रियों और ऑपरेटरों के लिए अनिवार्य है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और Vikramshila Setu Closure के बावजूद आवागमन सुचारू रूप से चलता रहे।







