West Bengal BJP: पश्चिम बंगाल में BJP अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को इशारों ही इशारों में खरी-खोटी सुनाई है। धीरेंद्र शास्त्री की मांसाहार को लेकर की गई टिप्पणी पर मचे बवाल के बाद, भट्टाचार्य ने राज्य के लोगों की भोजन संबंधी आदतों का जोरदार बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी बाहरी व्यक्ति बंगालियों को यह नहीं बता सकता कि वे क्या खाएंगे या क्या पहनेंगे, इस बात पर जोर देते हुए कि यह उनकी पार्टी का रुख है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इस समय कोलकाता में हनुमंत कथा सुनाने आए हैं। इसी दौरान उन्होंने दुर्गा पूजा के आसपास पंडालों के पास मांसाहारी भोजन करने वालों को ‘अपवित्र’ करार दिया था। उनके इस बयान से बंगाल में राजनीतिक और सांस्कृतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।
धीरेंद्र शास्त्री की किस बात पर भड़का बंगाल?
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था कि उन्हें बंगाल की एक बात पसंद नहीं है। उन्होंने नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों के पास मांसाहारी खाना खाने की बात पर आपत्ति जताई थी। शास्त्री ने हर हिंदू से आने वाली नवरात्रि में ऐसे लोगों को बाहर निकालने की अपील की, उन्हें अपवित्र बताया। उनके इस वीडियो के वायरल होने के बाद बंगाली हिंदुओं ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
विश्व हिंदू परिषद ने भी 26 अगस्त को दुर्गा पूजा पंडालों से मांसाहारी खाना दूर रखने की बात कही थी।
तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा ने धीरेंद्र शास्त्री पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘देखिये, मैंने बाबा बागेश्वर का नाम कभी नहीं सुना। मैंने अनेक ईश्वर के अनेक नाम सुने हैं। हो सकता है कि वह बहुत शक्तिशाली हो, मैंने सुना है कि वह जवान है। लेकिन मेरी उनसे एक विनती है कि बागेश्वर जी, आप मध्य प्रदेश या भारत के जिस कोने से आए हैं, ये बंगाल है, बंगाल में तो वही होगा, जो बंगाली चाहते हैं। बंगाल में वह नहीं होगा जो बाबा बागेश्वर चाहते हैं। वह मांस खाएगा, वह जरूर खायेगा। वह पूजा मंडप में नहीं खाएंगे, लेकिन मंडप के बाहर वह आराम से बैठकर मछली, मांस सब कुछ खाएगा।’
BJP अध्यक्ष ने क्यों किया बंगाली खाने का बचाव?
समीक भट्टाचार्य ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का नाम लिए बिना ही उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगाली मछली और मांस कैसे छोड़ सकते हैं। भट्टाचार्य ने स्वामी विवेकानंद का हवाला देते हुए कहा कि मां काली को मटन का भोग चढ़ता है और विवेकानंद से ऊपर उठने की कोशिश करना खतरनाक है। उन्होंने जोर दिया कि यह उनकी निजी राय है।
समीक भट्टाचार्य ने कहा, ‘लोगों से शाकाहारी बनने की अपील करने में कोई बुराई नहीं है। शाकाहार को लेकर एक अभियान भी चल रहा है। कई लोग और कुछ डॉक्टर भी इसकी सलाह देते हैं। लेकिन कोई साधु या राजनीतिक पार्टी आपको यह कैसे बता सकती है कि आप घर पर क्या खाएंगे?’
उन्होंने सोमवार को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी कभी कोई फरमान जारी नहीं करेगी कि पश्चिम बंगाल में लोग क्या खाएंगे और क्या पहनेंगे। भट्टाचार्य ने कहा, ‘जो धोती पहनना चाहे धोती पहने, जो लुंगी पसंद करे लुंगी पहने। बंगाली मछली के बिना कैसे रह सकते हैं और बाहर से आकर कोई कुछ कहे तो इसकी इतनी चिंता क्यों की जाए।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि बागेश्वर बाबा पूरे देश में सम्मानित और लोकप्रिय हैं और उन्होंने सिर्फ एक अपील की है।
शुभेंदु अधिकारी के डिनर और दुर्गा पूजा पोस्टर पर भी विवाद
धीरेंद्र शास्त्री के कोलकाता दौरे से जुड़े अन्य विवाद भी सामने आए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के ऑडिटोरियम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया था। इस डिनर में कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री कार्यालय ने रविवार को इस कार्यक्रम की तस्वीरें एक्स पर पोस्ट कीं और धीरेंद्र शास्त्री को ‘महाराज’ कहकर संबोधित किया।
वहीं, सोमवार को एक और विवाद खड़ा हो गया जब कोलकाता पुलिस के डिजिटल पोस्टर में मुख्यमंत्री की दुर्गा पूजा आयोजकों के साथ बैठक के लिए मां दुर्गा की तस्वीर में 10 की जगह 11 हाथ दिखाए गए। तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि BJP ने 2026 में बंगाल में जो बदलाव लाने का वादा किया था, उसने मां दुर्गा को भी नहीं बख्शा। समीक भट्टाचार्य ने इस गलती पर सफाई देते हुए कहा कि पोस्टर बनाने वाली विज्ञापन एजेंसी से यह गलती हुई है और इसे जरूर ठीक किया जाएगा।
पत्रकार अभिजीत मजूमदार ने भी एक्स पर लिखा कि बंगाल की हिंदुत्व की अपनी मुखर पहचान है, यह हिंदू राष्ट्रवाद की जन्मभूमि है और शाक्त पूजा का केंद्र भी है, इसलिए दुर्गा पूजा पंडालों के पास मांसाहार को लेकर बागेश्वर धाम की अपील गलत जानकारी पर आधारित है। यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक संवेदनशीलता और भाजपा के लिए भोजन संबंधी मुद्दों की राजनीतिक चुनौती को दर्शाता है।







