Bihar Holding Tax: बिहार के गांवों में रहने वाले करोड़ों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। जिस होल्डिंग टैक्स को लेकर ग्रामीण इलाकों में व्यापक नाराजगी थी, अब वह खत्म होने जा रही है। यानी, अगर आप गांव में रहते हैं और आपके पास पक्का या अर्धपक्का मकान है, तो उस पर होल्डिंग टैक्स देने की नौबत नहीं आएगी। Bihar सरकार आवासीय मकानों को इस टैक्स के दायरे से बाहर करने की तैयारी कर रही है।
आखिर क्यों बदला सरकार ने फैसला?
कुछ समय पहले पंचायतों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग तरह के टैक्स और शुल्क लगाने का प्रस्ताव लाया गया था। इस प्रस्ताव में पक्के और अर्धपक्के मकानों से भी सालाना होल्डिंग टैक्स लेने का प्रावधान था। हालांकि, इस फैसले के बाद गांवों में किसानों, मजदूरों और गरीब परिवारों के बीच भारी नाराजगी बढ़ने लगी। सवाल उठने लगा कि पहले से महंगाई और खर्च की मार झेल रहे परिवार अब मकान का टैक्स कैसे देंगे? विपक्ष ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था और सरकार पर जमकर हमलावर हुए थे।
गरीबों के आशियाने पर नहीं लगेगा बोझ
ग्रामीणों की इसी नाराजगी को देखते हुए सरकार अब नियमों में संशोधन करने जा रही है। सबसे खास बात यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने गरीबों के घरों पर सालाना होल्डिंग टैक्स लेने का प्रस्ताव भी पूरी तरह से हटाया जा सकता है। यह कदम उन लाखों परिवारों को सीधा लाभ देगा, जिन्होंने सरकारी सहायता से अपने सपनों का घर बनाया है।
पंचायतों की कमाई का नया रास्ता
जानकारी के मुताबिक, सरकार का फोकस अब ‘हर घर से टैक्स’ की जगह ‘व्यावसायिक गतिविधियों से राजस्व’ बढ़ाने पर हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत इस्तेमाल वाले भवनों से टैक्स और शुल्क वसूला जा सकता है। इसमें होटल, विवाह भवन, सिनेमा हॉल, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी और बड़ी चावल मिल जैसी व्यावसायिक गतिविधियां दायरे में आ सकती हैं। इस बदलाव से पंचायतों की आय भी सुनिश्चित होगी और आम ग्रामीण परिवारों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
15 जुलाई के फैसले में संशोधन
कैबिनेट ने 15 जुलाई को ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग टैक्स और शुल्क वसूलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। लेकिन अभी तक इसका गजट प्रकाशित नहीं हुआ है और पंचायती राज विभाग की अधिसूचना भी जारी नहीं हुई है। ऐसे में, सरकार के इस नए फैसले से करोड़ों ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलने वाली है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार जनभावनाओं के प्रति संवेदनशील है और आर्थिक बोझ को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।







