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ये Madhubani के मेजर साहेब के बड़े मजे हैं…

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संजय कुमार राय, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो प्रमुख। मधुबनी जिला में पुलिस के स्थानांतरण से लेकर पदस्थापन तक बड़ा खेल होते आ रहा हैं।

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मुख्यालय के आदेश की लगातार धज्जियां उड़ाई ही जा रही हैं। इसके अलावे, कई नियमों को ताक पर रखकर पुलिसिंग की जा रही है। ऐसे में, सवाल उठता हैं कि कब तक ऐसी पुलिसिंग होती रहेगी और पुलिस के आलाधिकारी मूकदर्शक बने रहेंगे। अगर ऐसा ही चलता रहा तो पुलिस विभाग में पुलिस पदाधिकारी से लेकर पुलिसकर्मी तक मनमर्जी करते रहेंगे और इसका शिकार आम जनता होते रहेगी।

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इन दिनों, मधुबनी जिला के नगर थाना के इंस्पेक्टर कहें या पुलिस लाइन का मेजर कहें, खूब चर्चा में हैं और आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा हैं। स्थानीय पुलिसकर्मियों का ही कहना हैं कि इनके ऊपर मधुबनी के एसपी और आईजी की कुछ विशेष कृपा हैं, इस कारण इन्हें दो-दो महत्वपूर्ण पद मिला हुआ हैं।

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कई पुलिसकर्मियों का यह भी कहना कि पुलिस मुख्यालय ने 25 सितंबर 22 को पुलिस निरीक्षक धर्मपाल और उनकी पत्नी को नवादा जिले के लिये विरमित करने का आदेश दिया था। लेकिन, इस आदेश पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

यह कार्रवाई मुख्यालय ने कर्मियों से प्राप्त अभ्यावेदन/अनुशंसा पर स्थानांतरण 30 और 31 अगस्त 22 की बैठक के बाद निर्णय लिया गया था। इसमें वैसे ग्यारह पुलिस पदाधिकारियों ने अभ्यावेदन दिया था जो पति-पत्नी थे।

इसमें तीन सिपाही और चालक पति-पत्नी का अभ्यावेदन मुख्यालय ने अस्वीकार कर दिया था। लेकिन, आठ पुलिस अवर निरीक्षक की स्थानांतरण का निर्णय स्थानांतरण समिति ने लिया था।

इसमें रीना कुमारी और धर्मपाल को नवादा जिला के लिये स्थानांतरण समिति ने निर्णय लेते हुये सहमति दे दिया और विरमित करने का आदेश भी दे दिया। मुख्यालय ने सभी एसपी, एसएसपी, आईजी समेत संबंधित विभाग को पत्र जारी करते हुये कहा कि विरमित करने से पूर्व उक्त कर्मियों के सेवा उपरांत ही जिलादेश निर्गत करने की कार्रवाई करेंगे।

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पुलिस मुख्यालय का स्पष्ट निर्देश था कि इन पदाधिकारियों को अविलंब विरमित करना सुनिश्चित करें। एवं अनुपालन प्रतिवेदन तुरंत पुलिस मुख्यालय को भेजें। यही नहीं, इस आदेश पर पुलिस महानिदेशक का भी अनुमोदन प्राप्त था।

ऐसे में फिर से सवाल उठना लाजमी हैं कि डीजीपी के आदेश को भी क्या मधुबनी के एसपी रद्दी के टोकरी में डाल देते हैं। यही नहीं, पुलिस निरीक्षक धर्मपाल के विभागीय जांच (कार्यवाही) संख्या 23/21के संचिका को पुलिस मुख्यालय अवलोकन कर रही हैं। ऐसे में, पद पर बनाए रखना कहा तक उचित हैं। पुलिस निरीक्षक धर्मपाल कहते हैं कि पूर्व में जो भी आरोप उनपर लगे हैं, वह बेबुनियाद और निराधार हैं।

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