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बड़ा बदलाव: Rent TDS Rules, अब 50,000 से अधिक किराए पर किरायेदार को ही काटना होगा TDS

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Rent TDS Rules: क्या आप हर महीने 50,000 रुपये से अधिक का किराया चुकाते हैं? यदि हाँ, तो अब सिर्फ किराया देना ही आपकी एकमात्र जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि एक महत्वपूर्ण कर संबंधी नियम भी आपकी जेब पर असर डालेगा। साल 2026 से लागू होने वाले नए प्रावधानों के अनुसार, धारा 194-IB के तहत किराएदार को ही TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) काटने की जिम्मेदारी निभानी होगी, जो अब तक मकान मालिक की नहीं, बल्कि किराया देने वाले की होगी।

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बड़ा बदलाव: Rent TDS Rules, अब 50,000 से अधिक किराए पर किरायेदार को ही काटना होगा TDS

क्या कहते हैं नए Rent TDS Rules और क्यों हैं ये महत्वपूर्ण?

अगर आपका मासिक किराया 50,000 रुपये से अधिक है, तो अब आपको पूरे साल के कुल किराए पर 2 प्रतिशत TDS काटना होगा। यह राशि आमतौर पर वित्तीय वर्ष के अंत में, यानी मार्च के महीने में एक साथ जमा की जाती है। उदाहरण के तौर पर, यदि आप प्रति माह 75,000 रुपये किराया देते हैं, तो एक साल में यह 9 लाख रुपये बनता है। इस पर 2 प्रतिशत के हिसाब से 18,000 रुपये का TDS बनता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह रकम एक साथ किराए के साथ जमा करना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए पहले से तैयारी करना महत्वपूर्ण है ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

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इस आयकर नियम को हल्के में लेना सही नहीं होगा, क्योंकि यदि TDS काटा नहीं जाता या समय पर जमा नहीं किया जाता, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी किराएदार पर आएगी। ऐसे में आयकर विभाग आप पर अतिरिक्त जुर्माना और ब्याज लगा सकता है। इसलिए, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पूरी प्रक्रिया सही समय पर पूरी की जाए। मार्च में कटौती के बाद, इसे 30 दिनों के भीतर, यानी 30 अप्रैल तक जमा करना होता है। इसके साथ ही, Form 26QC भरना भी अनिवार्य है। इस प्रक्रिया के बाद, मकान मालिक को Form 16C प्रदान करना होता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पूरा प्रोसेस सही तरीके से पूरा किया गया है।

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कई नौकरीपेशा लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पूरे साल का TDS एक ही बार में एडजस्ट करना पड़ता है, जिससे अचानक वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही, इस विषय पर मकान मालिक से पहले ही स्पष्ट रूप से बात करना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी गलतफहमी या परेशानी से बचा जा सके। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।

वेतनभोगी और मकान मालिकों के लिए चुनौतियाँ

इस नए नियम का उद्देश्य देश में किराए के आय पर कर संग्रह को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है। हालांकि, यह किराएदारों के लिए एक नई प्रक्रियागत जिम्मेदारी लेकर आया है, जिसका अनुपालन समय पर करना बेहद आवश्यक है। यह केवल एक वित्तीय बोझ नहीं, बल्कि एक कानूनी बाध्यता भी है। आपको हमेशा अद्यतन रहना चाहिए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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